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'साथ जी नहीं सकते, मर तो सकते हैं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी ज़िले में दो समलैंगिक युवतियों ने शादी करने के फ़ौरन बाद आत्महत्या कर ली जिसके बाद पूरे इलाक़े में सनसनी फैल गई है. जलपाईगुड़ी के भंडारपुर चाय बागान की दो समलैंगिक युवतियों ने मंदिर में एक-दूसरे को रुद्राक्ष की माला पहनाकर शादी की और इसके तुरंत बाद ज़हर खा लिया. आत्महत्या करने के पहले उन्होंने हिंदी में एक पत्र भी लिखा जिसमें लिखा था.. ‘हम एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं और अलग होकर जीने की कल्पना तक नहीं कर सकते. हमने मंदिर में शादी कर ली है. लेकिन हम जानते हैं कि समाज कभी भी हमारी शादी को स्वीकृति नहीं देगा. इसलिए ज़हर खाकर अपनी जान दे रहे हैं. हम साथ जी नहीं सकते तो क्या साथ मर तो सकते हैं. मरने के बाद हमें एक साथ ही जलाया या दफ़नाया जाए.’ पोस्टमार्टम के बाद मंगलवार की रात उनको दफ़ना दिया गया लेकिन एक साथ नहीं बल्कि अलग-अलग. यह राज्य में अपने तरह की पहली घटना है. रूपमति और कल्पना युवतियों में से एक रूपमति तिर्की की उम्र 18 वर्ष थी और वह सातवीं कक्षा की छात्रा थी. लेकिन सांस की बीमारी के कारण उसके पिता उसे लगभग आठ महीने पहले इलाज के लिए चाय बागान में 21 वर्षीया कल्पना छेत्री के पास लाए. तब से वह कल्पना के घर ही रहती थी. रूपमति अपने चार भाई-बहनों में सबसे छोटी थी. उसके पिता चमारू तिर्की साप्ताहिक बाजारों में घूम-घूम कर सब्जी बेचते हैं. चमारू ने बताया,"दोनों हमेशा साथ रहती थीं. मैंने सोचा कि शायद यह इलाज के लिए जरूरी है. लेकिन मुझे क्या पता था कि बात कुछ और है." कल्पना ने आठवीं तक पढ़ने के बाद झाड़-फूंक का काम शुरू किया था. अपनी चार बहनों में सबसे बड़ी कल्पना के पिता बहादुर और माँ राधिका भंडारपुर चाय बागान में ही मज़दूर हैं. राधिका ने बताया,"कल्पना ने घर के एक कमरे में मंदिर भी बनवाया था और रूपमति के साथ हमेशा उसी में रहती थी. दोनों साथ-साथ बागान और उससे सटे एक झरने के किनारे घंटों घूमती रहती थीं." रूपमती की बहन बेहुल ने बताया कि उसकी बहन ने कल्पना के साथ अपने संबंधों के बारे में कभी किसी को भनक तक नहीं लगने दी थी. कल्पना के पड़ोस में रहने वाले सुमित उरांव ने बताया कि उन्होंने कई बार दोनों को साथ घूमते देखा था. लेकिन उनके बीच क्या है, इसका किसी को अनुमान नहीं था. स्तब्ध बागानवासी मंदिर में शादी के बाद जहर खा लेने के दो दिन बाद बागान की झाड़ियों के पीछे सबसे पहले एक मज़दूर ने ही उनका शव देखा. उसके बाद तो मानो बागान के शांत जीवन में तूफान आ गया. जलपाईगुड़ी शहर से 12 किमी दूर इस बागान के बाशिंदे अब तक इस सदमे से नहीं उबर सके हैं. बागान के मुनीर तिर्की कहते हैं,"इस विचित्र घटना ने हमको स्तब्ध कर दिया है." चाय बागान के पढ़े-लिखे युवकों ने समलैंगिक संबंधों पर आधारित फिल्मों के बारे में तो सुना था लेकिन अपने बागान सचमुच ऐसी कोई घटना हो जाएगी, इसकी तो उन्होंने कल्पना तक नहीं की थी. |
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