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बुधवार, 14 जुलाई, 2004 को 22:31 GMT तक के समाचार
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'समलैंगिक शादी का विरोध जारी रहेगा'
समलैंगिक शादी
अमरीका के कई प्रांतों में इस क़ानूनी रूप देने की कोशिश हो रही है
अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि समलैंगिक विवाह पर पाबंदी लगाने का प्रस्ताव सीनेट में ख़ारिज होने के बावजूद वे इसे ग़ैर क़ानूनी बनाने के लिए अपनी कोशिश जारी रखेंगे.

समलैंगिकों में शादी पर पाबंदी लगाने के लिए अमरीकी संविधान में संशोधन की कोशिश को सीनेट ने ठुकरा दिया है.

रिपब्लिकन सदस्यों के इस प्रस्ताव को राष्ट्रपति जॉर्ज बुश का समर्थन हासिल है. लेकिन इस प्रस्ताव को ज़रूरी 60 सीनेट सदस्यों का समर्थन नहीं मिल पाया.

रिपब्लिक सदस्यों ने कहा है कि वे इस मामले पर चुप नहीं बैठेंगे लेकिन अब तो यही लगता है कि नवंबर के राष्ट्रपति चुनाव से पहले यह प्रस्ताव पास नहीं हो सकता.

अमरीका में समलैंगिकों में शादी का मामला उस समय गरमा गया था जब देश के कई प्रांतों ने इस क़ानूनी रूप देने की पहल की थी.

हालाँकि सीनेट में इस प्रस्ताव के पक्ष में 50 और विरोध में 48 वोट मिले लेकिन यह इस प्रस्ताव को क़ानून बनाने की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए कम पड़ा.

कोशिश

रिपब्लिक सदस्यों ने कहा है कि वे इस प्रस्ताव को क़ानून बनाने की अपनी कोशिश जारी रखेंगे.

लेकिन डेमोक्रेट सदस्यों का कहना है कि इस मामले पर इतनी जल्दी संविधान में संशोधन की ज़रूरत नहीं है.

रिपब्लिक सदस्यों का कहना है कि वे इस मामले पर प्रस्ताव इसलिए लाना पड़ा क्योंकि मासाच्यूसेट्स की अदालत ने यह फ़ैसला दिया कि समलैंगिक जोड़े क़ानूनी रूप से शादी कर सकते हैं और सैन फ़्रांसिस्को में तो समलैंगिक जोड़ों को शादी का प्रमाणपत्र भी मिलना शुरू हो गया था.

अमरीका के 38 प्रांतों ने पहले ही समलैंगिक शादी पर पाबंदी लगा रखी है लेकिन फ़्लोरिडा, न्यू जर्सी, ओरेगॉन और नेब्रास्का में इसे क़ानूनी रूप देने की कोशिश चल रही है.

संदेश

राष्ट्रपति बुश चाहते हैं कि इस पर राष्ट्रव्यापी पाबंदी लगा दी जाए ताकि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग क़ानून न बन पाए.

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राष्ट्रपति बुश खुल कर समलैंगिक शादी के विरोध में आए हैं

पिछले सप्ताहंत राष्ट्रपति बुश ने अपने रेडियो संदेश में कहा था कि पुरुष और स्त्री के बीच शादी सभ्यता का सबसे बुनियादी स्वरूप है.

बुश ने कहा था, "इस तरह की कठिन बहस कुछ जजों और स्थानीय अधिकारियों के द्वारा हमारे देश पर थोपी जा रही है जो अपने स्तर पर विवाह का मतलब बदलने की कोशिश कर रहे हैं."

उन्होंने कहा था कि संविधान में संशोधन आसानी से नहीं होता लेकिन विवाह के स्वरूप को बचाने के लिए हमारे देश के पास दूसरा कोई रास्ता नहीं.

राष्ट्रपति पद के लिए उनके प्रतिद्वंद्वी सीनेटर जॉन कैरी का मानना है कि इस मामले पर प्रांतों को स्वतंत्र छोड़ देना चाहिए.

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