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ईरान में 'अस्थायी विवाह' की वकालत | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सामाजिक समस्याओं को दूर करने के लिए ईरान के गृह मंत्री मुस्तफ़ा मोहम्मदी अस्थाई विवाह की वकालत कर रहे हैं. उनका ये भी कहना है कि युवाओं को कम उम्र में ही शादी कर लेनी चाहिए. ग़ौरतलब है कि शिया मुसलमानों को एक तय समय के लिए शादी करने की इजाज़त है और यह नियत समय एक घंटे से लेकर एक सदी तक हो सकता है. गृह मंत्री मुस्तफ़ा मोहम्मदी मौलवी भी हैं और वे कहते हैं कि शादी इंसान की जरूरत है और अस्थायी विवाह सिर्फ़ सेक्स की पूर्ति के लिए नहीं करनी चाहिए बल्कि इसके ज़रिए सामाजिक समस्याओं को सुलझाने का प्रयास करना चाहिए. ऐसा नहीं है कि ईरान में अस्थायी विवाह की बात पहले नहीं उठी है. 15 वर्ष पहले ही लीविंग इन यानी बिना विवाह किए लड़का और लड़की के साथ रहने के विकल्प के तौर पर अस्थायी विवाह का उपाय सुझाया गया था. तत्कालीन राष्ट्रपति हाशमी रफ़संजानी ने उस समय कहा था कि यह पुरुष और महिलाओं के लिए सेक्स की जरूरत की पूर्ति का तरीका है. उन्होंने कहा था इसके लिए किसी मौलवी तक की जरूरत नहीं है और जोड़ियाँ ख़ुद ही निकाहनामा पढ़कर शादी कर सकती हैं. ऐसी लड़कियाँ जो अपने पुरुष मित्र के साथ कहीं बाहर जाना चाहती है और साथ ही होटल के एक ही कमरे में रहना चाहती हैं तो गिरफ़्तारी से बचने के लिए अस्थाई विवाह कर सकती है. इसके अलावा ऐसी ग़रीब महिलाएं जिन्हें वित्तीय मदद की जरूरत है वे भी अस्थायी शादी कर सकती हैं. लेकिन इस विचार का ईरान में विरोध करने वालों की कमी नहीं है. एक महिला सांसद गृह मंत्री से सवाल पूछती हैं, '' अगर कोई आदमी उनकी बेटी की शादी के समय उसका हाथ माँगने पहुँच जाए तो क्या गृह मंत्री बताएंगे उसके कितने अस्थायी विवाह होंगे.'' जबकि दूसरे का कहना है कि अस्थायी विवाह को बढ़ावा देने से कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं. अभी भी ईरान में अस्थायी विवाह से हज़ारों बच्चे हैं जिन्हें अवैध माना जाता है. जुमे की नमाज़ के दौरान नेताओं ने कहा कि ईरान में ऐसे केंद्र की जरूरत है जो युवाओं को जीवनसाथी ढूंढने में मदद कर सके. दूसरी ओर कुछ कट्टरपंथी अख़बारों की शिकायत है कि तेहरान में एक ट्रेवल एजेंट 'हॉली डे पैकेज' के तहत अस्थायी विवाह करने वालों को ख़ास सुविधाएं दे रहा है. | इससे जुड़ी ख़बरें अमरीका-ईरान बातचीत 'सकारात्मक'28 मई, 2007 | पहला पन्ना कई सीमाओं को तोड़कर बंधन जोड़ा25 मई, 2007 | भारत और पड़ोस 'इंटरनेट की सेंसरशिप ज़ोर पर'18 मई, 2007 | विज्ञान शिया महिलाओं को तलाक़ का हक़ मिला26 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस ईरान को मिली एक महीने की समयसीमा31 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना 75 प्रतिशत तलाक़ महिलाओं की ओर से!08 मई, 2005 | भारत और पड़ोस शरीयत जागरुकता अभियान पर विचार29 अप्रैल, 2005 | भारत और पड़ोस प्यार का बिल्कुल अनोखा अंदाज़27 मार्च, 2005 | खेल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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