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यूरोप में अवैध रोज़गार पर गाज | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
यूरोपीय संघ ने अपने सदस्य देशों में अवैध रूप से आकर कामकाज करने के मामलों पर नियंत्रण पाने के लिए कुछ नए सुझाव पेश किए हैं जिनके तहत अगर कोई औद्योगिक घराना ऐसे लोगों को रोज़गार देता पाया गया तो जेल की सज़ा भी हो सकती है. यूरोपीय संघ के न्याय मामलों के मंत्री फ्रेंको फ्रैटिनी ने यह भी पेशकश की है कि अवैध आप्रवासियों को कामकाज देने वाली कंपनियों पर अचानक छापे मारने के मामलों में कम से कम पाँच गुना बढ़ोत्तरी की जानी चाहिए. फ्रेंको फ्रैटिनी का कहना था कि यूरोपीय देशों में लगभग 16 प्रतिशत कामकाज अवैध आप्रसियों के ज़रिए ही होता है. ऐसा अनुमान है कि यूरोपीय संघ के देशों में तीस से अस्सी लाख के बीच अवैध आप्रवासी रहते हैं और यह संख्या हर साल पाँच लाख के औसत से बढ़ रही है क्योंकि अवैध आप्रवासियों को आसानी से कामकाज मिल जाता है. ऐसे लोगों के लिए भी नए दंडों का प्रावधान किया जा रहा है जो अपने यहाँ साफ़-सफ़ाई करने का काम कराने के लिए अवैध आप्रवासियों को नौकरी पर रखते हैं. रोज़गार देने वाली कंपनियों को यह जाँच-पड़ताल करनी होगी कि जिस व्यक्ति को भी वह कामकाज देते हैं उनके पास निवास पर्मिट हो और उसके बारे में राष्ट्रीय स्तर के अधिकारियों को सूचित करना होगा. जो कंपनियाँ इन नियम-क़ानूनों का उल्लंघन करेंगी उन पर लगाए जाने वाले जुर्मानों में यह भी शामिल होगा कि ऐसे अवैध आप्रवासियों को वापस उनके देश पहुँचाने और ख़र्च उठाने की ज़िम्मेदारी उन्हीं कंपनियों पर ही होगी. ऐसे लोगों और कंपनियों पर आपराधिक जुर्माने किए जाएंगे जिन्हें तस्करी के शिकार हुए लोगों को कामकाज देने, अवैध आप्रवासियों को नौकरी देने का दोषी पाया जाएगा. यूरोपीय संघ के न्याय मामलों के मंत्री फ्रेंको फ्रैटिनी का कहना था, "चूँकि यूरोपीय संघ के देशों में ग़ैरक़ानूनी तरीके से कामकाज आसानी से मिल जाता है इसलिए अवैध रूप से लोग इन देशों में दाख़िल हो जाते हैं और यही अवैध आव्रजन का एक मुख्य कारण है." फ्रैटिनी का कहना था कि अवैध आप्रवासियों को कामकाज देने के मामलों में पकड़े जाने की संभावना काफ़ी कम थी क्योंकि औसतन 50 में से एक कंपनी पर छापा मारकर जाँच-पड़ताल की जाती थी. अब नए प्रस्तावों के तहत छापा मारने के प्रयास पाँच गुना बढ़ाए जाएंगे. यूरोपीय आयोग का कहना है कि अवैध आप्रवासियों को ज़्यादातर निर्माण कार्य, खेती-बाड़ी, घरेलू कामकाज, साफ़-सफ़ाई, खान-पान और अन्य इसी तरह के क्षेत्रों में आसानी से कामकाज मिल जाता है. अधिकारियों का कहना है कि नए प्रावधानों का मक़सद ऐसी कंपनियों और लोगों को निशाना बनाना है जो अपने स्वार्थ के लिए लोगों का शोषण करते हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'एचआईवी ग्रस्त आप्रवासियों पर रोक'13 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना विदेशियों के खुदरा व्यापार करने पर रोक01 अप्रैल, 2007 | कारोबार वीज़ा प्रणाली में बदलाव से लोग परेशान16 जनवरी, 2007 | पहला पन्ना दुनिया में 19 करोड़ प्रवासी:संयुक्त राष्ट्र07 जून, 2006 | पहला पन्ना अमरीकी सीनेट में आप्रवासी विधेयक पास25 मई, 2006 | पहला पन्ना फ़्रांस में आप्रवासियों का प्रवेश कठिन17 मई, 2006 | पहला पन्ना अमरीकी आप्रवासियों का प्रदर्शन01 मई, 2006 | पहला पन्ना संभावनाओं से भरे हैं द्वितीय श्रेणी के नगर26 अप्रैल, 2006 | कारोबार इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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