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संभावनाओं से भरे हैं द्वितीय श्रेणी के नगर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय सलाहकार संस्था अर्नस्ट एंड यंग की हाल में आई एक रिपोर्ट में रिटेल क्षेत्र के विकास के मामले में भारत को नंबर एक देश बताया है. अभी इस देश में क़रीब एक करोड़ बीस लाख खुदरा दुकानों में से 80 प्रतिशत दुकानें छोटे पारिवारिक कारोबार के तौर पर चलाई जाती हैं. अभी क़रीब 230 अरब डालर के खुदरा बाज़ार में सिर्फ़ तीन प्रतिशत संगठित खुदरा कारोबार है, जिनमें मॉल, सुपर बाजार वगैरह शामिल हैं. पर इसमें बहुत तेज़ बढ़ोत्तरी के आसार हैं, अभी क़रीब 7 अरब डालर के कारोबार से इसके 2010 तक 30 अरब डालर तक होने के आसार हैं. दूसरी श्रेणी के शहरों में इस समय 81 शापिंग मॉल निर्माणाधीन है. मुंबई, दिल्ली के अलावा चंडीगढ़, जयपुर, कोचीन, मैसूर, कोयंबटूर, तिरुवंनतपुरम, अहमदाबाद, नासिक, विशाखापट्टनम् और आगरा जैसे क्षेत्र भविष्य के बेहतर क्षेत्र के रुप में उभरेंगे. जिन इलाकों में शापिंग मॉल बन रहे हैं, उनके आसपास की प्रापर्टी के भाव खुद-ब-खुद बढ़ जायेंगे. दिल्ली के पास गाज़ियाबाद के कुछ इलाक़े इसका उदाहरण हैं. दिल्ली से सटे गाज़ियाबाद के कुछ इलाक़ों में चार-पांच शापिंग मॉल के आने के बाद इन क्षेत्रों की प्रापर्टी के भावों में 50 से लेकर 80 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दो सालों में हो गई है. भविष्य के शहर इसी तरह की कहानी उन शहरों में दोहराई जानी है, जहां शापिंग मॉल निर्माणाधीन हैं. ऐसे शहरों में द्वितीय श्रेणी के चंडीगढ़, जयपुर, कोचीन, मैसूर, कोयंबटूर, तिरुवनंतपुरम, अहमदाबाद, नासिक, विशाखापट्टनम और आगरा जैसे शहर शामिल हैं. इसके अलावा एक और वजह है, जिसके चलते द्वितीय श्रेणी के शहरों में प्रापर्टी के भाव बढ़ेंगे. साफ्टवेयर कारोबार की प्रतिनिधि संस्था नासकौम के मुताबिक साफ्टवेयर कारोबार के आठ प्रमुख क्षेत्र हैं- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (नोएडा, गुड़गांव, ग्रेटर नोएडा) मुंबई, बंगलौर, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद, कोचीन और पुणे. इन क्षेत्रों और इनके आसपास के क्षेत्रों में प्रापर्टी के भावों में तेज़ बढ़ोत्तरी के पूरे आसार हैं. ये शहर तमाम बहुराष्ट्रीय कंपनियों, शापिंग मॉल, काल सेंटर कारोबारियों, कंपनियों के दृष्टिपटल पर हैं. इन शहरों में क्रय क्षमता का अभाव नहीं है इसलिए यहां शापिंग मॉल वगैरह खोलना फ़ायदे का सौदा है. इन शहरों के संभावित तेज विकास की दूसरी वजह यह है कि भारत में अब जिस तरह का विकास हो रहा है, उसमें ऐसे कारोबारों की महत्वपूर्ण भूमिका है, जिनमें महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्रों की नजदीकी ज़रुरी नहीं है. कॉल सेंटरों का कारोबार ऐसा ही कारोबार है. इनमें से कोलकाता, हैदराबाद, कोचीन और पुणे में अभी बहुत संभावनाएं हैं. गौरतलब है कि बंगलौर की कई साफ्टवेयर कंपनियां अपना कारोबार हैदराबाद में ले जा रही हैं. कॉल सेंटर और साफ्टवेयर कंपनियां जिन शहरों में जा रही हैं, वहां उन्हें दफ़्तरों की जगह के साथ-साथ अपने कर्मचारियों के लिए रहने की जगह भी चाहिए. दिल्ली के निकट नोएडा में हाल में जो भाव बढ़े हैं, उनके पीछे यही कॉल सेंटर और साफ्टवेयर कंपनियां हैं. कोलकाता निकट भविष्य में ऐसा शहर हो सकता है, जो बीपीओ कारोबार के महत्वपूर्ण केंद्र के रुप में उभरे. महानगर होने के बावजूद इस शहर में प्रापर्टी के भाव उन ऊंचाइयों पर नहीं गए हैं, जहां मुंबई या दिल्ली के जा चुके हैं. |
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