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गुरुवार, 06 अप्रैल, 2006 को 09:50 GMT तक के समाचार
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शेयर बाजार से फ़ायदा कैसे उठाएँ

शेयर बाज़ार
म्यूचुअल फ़ंड में निवेश एक अच्छा विकल्प है
भारत का शेयर बाज़ार लगातार ऊपर जाने की वजह से इधर ज़बरदस्त खबरों में हैं और इस उछाल से शेयर बाज़ार में निवेश करने से अच्छा प्रतिफल मिल सकता है.

चार अप्रैल, 2005 को मुंबई शेयर बाज़ार का सूचकांक 11,638 अंकों पर बंद हुआ. हाल के आँकड़ों के हिसाब से उभरते हुए शेयर बाज़ारों में भारत का बाज़ार सबसे जोरदार प्रतिफल वाला साबित हो रहा है.

सूचकाँक और प्रतिफल
भारत में मार्च 2005 में शेयर सूचकांक रहा 6493 जोकि मार्च 2006 में 11,280 पर पहुँच गया और इस पर प्रतिफल मिला 73.7 प्रतिशत.
मैक्सिको का शेयर सूचकांक मार्च 2005 में था 19273 जो मार्च 2006 में रहा 12,677 और इस पर प्रतिफल रहा 52.0 प्रतिशत.
पाकिस्तान का शेयर सूचकांक मार्च 2005 में था 11,486 जो मार्च 2006 में रहा 7,770 और इस पर प्रतिफल मिला 47.8 प्रतिशत.
ब्राजील का शेयर सूचकांक मार्च 2005 में 37,952 था जो मार्च 2006 में 26,611 रहा और इस पर प्रतिफल रहा 42.6 प्रतिशत.
दक्षिण कोरिया का सूचकांक मार्च 2005 में था 1360 जो मार्च 2006 में 966 रहा और इस पर प्रतिफल रहा 40.8 प्रतिशत.

दाहिनी तरफ़ दिए गए आँकड़ों से समझें तो भारत के शेयर बाज़ारों में एक साल में क़रीब 73.7 प्रतिशत का प्रतिफल रहा है, किसी भी पैमाने से यह प्रतिफल बहुत शानदार है.

बाज़ार के और ऊपर जाने के आसार इसलिए हैं कि आम निवेशकों के साथ-साथ म्यूचुअल फंड और विदेशी संस्थागत निवेशक भी भारतीय शेयर बाज़ारों में जमकर निवेश कर रहे हैं.

इसलिए आने वाले कम से कम दो सालों तक शेयर बाज़ार के स्वस्थ रहने की उम्मीद की जा सकती है. प्रवासी निवेशकों के लिए शेयर बाज़ार में ख़ासे अवसर हैं.

अर्थव्यवस्था में हाल में जो बदलाव हुए हैं, उनमें से एक महत्वपूर्ण यह है कि कभी कृषि प्रधान होने वाला यह देश अब सेवा क्षेत्र के उद्यमों की प्रधानता वाला देश हो गया है यानी सकल घरेलू उत्पाद का करीब 54 प्रतिशत सेवा क्षेत्र से आ रहा है.

सेवा क्षेत्र के दो महत्वपूर्ण उद्योग हैं - मीडिया और बैंकिंग. इन उद्योगों के शेयरों में निवेश करके उचित प्रतिफल हासिल किया जा सकता है.

तस्वीर बदली है

मीडिया क्षेत्र का फैलाव भारत में ख़ासी तेज़ी के साथ हो रहा है. मीडिया क्षेत्र के शेयरों में अख़बार कंपनियों के शेयर हैं, रेडियो सेवा चलाने वाली कंपनियों के शेयर हैं, टीवी न्यूज़ चैनल चलाने वाली कंपनियों, सास बहू से लेकर अपराध जगत के हिट सीरियल बनाने वाली कंपनियों के शेयर हैं.

फिल्म बनाने वाली कंपनियों के शेयर भी अब बाज़ार में उपलब्ध हैं. भारतीय औद्योगिक जगत की प्रतिनिधि संस्था फिक्की ने एक अध्ययन कराया जिसमें अनुमान व्यक्त किया गया था कि 1999 में भारत में मनोरंजन उद्योग का कारोबार क़रीब 150 अरब रुपये था, 2005 के अंत तक यह क़रीब 650 अरब का हो चुका था.

दूसरा महत्वपूर्ण क्षेत्र बैंकिंग है. भारत के तेज़ी से विकसित होते मध्यवर्ग के चलते बैंकिंग खासे मुनाफ़े का कारोबार हो गई है. कुल ख़रीदी गई कारों की अस्सी फ़ीसदी कारें क़र्ज़ लेकर ख़रीदी जा रही हैं. क़र्ज़ को धन्यवाद देते हुए.

दस साल पहले मकान मालिक बनने की औसत आयु 45 साल थी, लेकिन अब औसतन 32 साल की उम्र में ही मकान मालिक बन जाते हैं, किसी बैंक से लिए गए क़र्ज़ की बदौलत.

तमाम नई बैंकिंग सुविधाओं का विकास हो रहा है. कुल मिलाकर बैंकिंग क्षेत्र के मुनाफ़े आने वाले कुछ सालों में तेजी से बढ़ेंगे.

भारत में शेयरों में प्रवासी भारतीय निवेश कर सकते हैं. इसके लिए आवश्यक है कि वे डी-मेट खाता खोलें. डी-मेट से आशय है डी-मटीरियलाइज़ेशन यानी शेयर सर्टिफिकेट अब भौतिक रुप में नहीं रखे जाते, बल्कि उन्हे बैंक खातों की तरह के खातों में रखा जाता है.

कई एजेंसियां इस तरह के खाते खोलती हैं. ये एजेंसियां भारत में कार्यरत दो डिपाजिटरियों से संबद्ध हैं. इनके वैबसाइट पते इसी पन्ने पर दाहिनी तरफ़ इंटरनेट लिंक्स में हैं.

प्रवासी भारतीय इनसे संबद्ध किसी संस्था में अपना डी-मेट खाता खोल सकते हैं. इसके लिए उन्हें आवश्यक जानकारियां देनी होती हैं. भारत में डी-मेट खातों का चलन काफी पुराना हो चुका है और इनके कामकाज का ख़ासा तजुर्बा भारतीय एजेंसियों को है.

इनके ज़रिए निवेश करके प्रवासी भारतीय भारत के शेयर बाज़ार के उछाल में से अपना शेयर ले सकते हैं.

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