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प्रवासी भारतीयों ने भेजी सर्वाधिक रकम | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रवासी भारतीयों ने जनवरी से सितंबर, 2003 के बीच 13 अरब 30 करोड़ डॉलर भारत भेजे. ये दुनिया के किसी भी प्रवासी समुदाय द्वारा स्वदेश भेजी गई सबसे बड़ी राशि है. भारत के नेशनल कॉउंसिल फॉर एप्लाइड इकनॉमिक रिसर्च के अनुसार ये रकम दुनिया भर के प्रवासी समुदाय द्वारा भेजी राशि का 15 प्रतिशत है. इस संगठन का कहना है कि जनवरी, 2004 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 104 अरब डॉलर तक पहुँच गया. इस संस्थान का कहना है कि सन् 2003 में पर्यटन उद्योग से विदेशी मुद्रा में होने वाली आय में 23 प्रतिशत की वृद्धि हुई. संस्थान की राय है कि विशाल विदेशी मुद्रा भंडार होने से भारतीय वित्त मंत्री को आयात शुल्क में कटौती का अवसर मिलेगा. इस संबंध में इंस्टीट्यूट ऑफ़ इकॉनोमिक ग्रोथ के प्रोफेसर बीबी भट्टाचार्य ने बीबीसी हिंदी सेवा से बातचीत में कहा कि मध्य-पूर्व में रहने वाले भारतीय पहले से ही अपने परिवारों को अपनी बचत भेजते आए हैं लेकिन पिछले 5-6 वर्षों में इसमें भारी वृद्धि हुई है. उनका कहना था कि प्रवासी भारतीय बैंक में या फिर शेयर बाज़ार में पैसा लगाते हैं जबकि चीनी प्रवासी समुदाय का पैसा प्रत्यक्ष विदेशी मुद्रा में चला जाता है. |
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