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मंगलवार, 01 मई, 2007 को 06:38 GMT तक के समाचार
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चरमपंथी हमलों में बढ़ोतरी: अमरीका
चरमपंथी हमला
इराक़ में बड़ी संख्या में बच्चे और महिलाएँ चरमपंथी हमलों का शिकार हुए हैं.
दुनिया भर में चरमपंथी हमलों में मरने वालों की संख्या में ख़ासी बढ़ोतरी हुई है. पिछले साल इन हमलों में 20 हज़ार से अधिक लोग मारे गए हैं.

अमरीकी सरकार की विदेश विभाग की सालाना रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल चरमपंथी हमलों में वर्ष 2005 की तुलना में सात हज़ार अधिक लोग मारे गए.

यानी चरमपंथी हमलों के शिकार लोगों की संख्या में 45 फ़ीसदी का इजाफ़ा हुआ है. इस संख्या में बढ़ोतरी की मुख्य वजह इराक़ में हिंसा में वृद्धि रही है.

रिपोर्ट में इराक़ के पड़ोसी देश ईरान को आतंकवाद के सबसे बड़ा प्रायोजक बताया गया है.

प्रायोजित चरमपंथ

आरोप लगाया गया है कि ईरान पूरे मध्य एशिया ख़ासकर इराक़ में चरमपंथी गुटों को मदद कर रहा है.

कोलंबियाई विद्रोहियों को गतिविधियाँ अंजाम देने के लिए अपनी ज़मीन का इस्तेमाल करने की छूट देने के वास्ते वेनेज़ुएला सरकार की आलोचना की गई है.

इराक़ में गठबंधन सेना की तमाम कोशिशों के बावजूद चरमपंथी गुटों के हमलों में कमी नहीं आई है. बल्कि वर्ष 2005 की तुलना में पिछले साल दोगुने हमले हुए.

पिछले साल इराक़ में 6630 हमले हुए और यह आंकड़ा पूरी दुनिया में हुए चरमपंथी हमलों का 45 फ़ीसदी है.

विदेश विभाग ने अमरीका की 16 ख़ुफिया सेवाओं से मिले आंकड़ों के आधार पर अपनी सालाना रिपोर्ट तैयार की है.

अस्थिरता

रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान शिया कट्टरपंथियों का समर्थन कर इराक़ में अस्थिरता बढ़ा रहा है.

 हालाँकि हमने बड़ी संख्या में अल क़ायदा चरमपंथियों को पकड़ा या मारा है, लेकिन ये अब भी इराक़ की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा हैं
फ़्रेंक उरबेंसिंक, निदेशक, एनसीटीसी

इराक़ में शिया कट्टरपंथी सुन्नियों और अमरीकी तथा ब्रिटिश सेनाओं को निशाना बना रहे हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि कट्टरपंथी और आत्मघाती दस्ते जातीय हिंसा में लिप्त हैं और आपराधिक संगठन इराक़ के इस ख़राब सुरक्षा हालात का फ़ायदा उठा रहे हैं.

अफ़ग़ानिस्तान में भी चरमपंथी हमलों में ख़ासी वृद्धि हुई है.

रिपोर्ट के अनुसार चरमपंथियों को मदद करने के मामले में सीरिया दूसरे स्थान पर है. उसके बाद क्यूबा, उत्तर कोरिया और सूडान का नंबर आता है.

पिछले साल बड़ी संख्या में बच्चे भी चरमपंथी हमलों का शिकार हुए हैं. यह संख्या 2005 की तुलना में 80 फ़ीसदी अधिक है.

रिपोर्ट के अनुसार 700 बच्चे मारे गए हैं और 1100 घायल हुए हैं.

अमरीका के नेशनल काउंटरटेररिज़्म सेंटर (एनसीटीसी) का कहना है कि अल क़ायदा हमलों की नई रणनीति बना रहा है.

एनसीटीसी के निदेशक फ़्रेंक उरबेंसिक ने कहा, "हालाँकि हमने बड़ी संख्या में अल क़ायदा चरमपंथियों को पकड़ा या मारा है, लेकिन ये अब भी इराक़ की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा हैं."

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