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चरमपंथियों ने ली ज़िम्मेदारी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में चरमपंथी गुटों के एक समूह ने गुरुवार को संसद भवन पर हुए आत्मघाती हमले की ज़िम्मेदारी ली है. बताया जा रहा है कि चरमपंथी संगठनों के इस समूह के तार अल क़ायदा से जुड़े हैं. चरमपंथी समूह का कहना है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि राजधानी बग़दाद में अमरीकी सुरक्षा के बड़े दावों की पोल खोली जा सके. गुरुवार को इराक़ के संसद भवन के कैफ़ेटेरिया में एक आत्मघाती हमले में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई थी. मरने वालों में एक सांसद भी थे. इस आत्मघाती हमले में दो दर्जन लोग घायल हो गए थे. हालांकि इस बात को दावे के साथ नहीं कहा जा सकता है कि हमले का दावा करने वाली बात सही है पर बग़दाद से बीबीसी संवाददाता ने बताया कि चरमपंथी समूहों की वेबसाइटों पर नज़र रखने वाले एक संस्थान के मुताबिक यह दावा सही है. यह भी ख़बर मिली है कि इराक़ पुलिस ने संसद भवन के कैफ़ेटेरिया के तीन कर्मचारियों को इस हमले के संदर्भ में हिरासत में लिया है. इन लोगों से पूछताछ की जा रही है. उधर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी इराक़ की संसद पर हुए इस हमले की तीखी निंदा की है. विशेष सत्र इस आत्मघाती हमले के एक दिन बाद ही यानी शुक्रवार को इराक़ सरकार ने हमले के बाद एकजुटता दिखाने और हमले की निंदा करने के लिए संसद का एक विशेष सत्र बुलाया.
हालाँकि इस विशेष सत्र में सांसदों की मौजदगी काफ़ी कम रही क्योंकि शहर में कर्फ्यू लागू रहने और यातायात पर कुछ पाबंदियाँ लगे रहने की वजह से अनेक सांसद विशेष सत्र में नहीं पहुँच पाए. शुक्रवार का दिन होने की वजह काफ़ी लोग जुमे की नमाज़ पढ़ने के लिए जाते हैं और इस मौक़े पर नमाज़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राजधानी बग़दाद में विभिन्न इलाक़ों में कर्फ़्यू लगाया गया. इस बीच अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने हमले की निंदा करते हुए कहा है कि उनका देश चरमपंथियों के ख़िलाफ़ इराक़ को समर्थन देता रहेगा. इराक़ी प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी ने घटना की जाँच के आदेश दे दिए हैं. ऐसा पहली बार हुआ है जब इराक़ी संसद को हमलावरों ने निशाना बनाया है. अमरीकी ख़बरों में पहले कहा गया था कि बग़दाद स्थित संसद भवन में हुए इस आत्मघाती बम धमाके में तीन सांसदों समेत कम से कम आठ लोग मारे गए थे लेकिन शुक्रवार को मिली ख़बरों में कहा गया है कि मारे गए लोगों में सिर्फ़ एक ही सांसद था. मारे गए एक सांसद मोहम्मद हसन अवाद सुन्नी ग्रुप नेशनल डायलॉग ब्लॉक के सदस्य थे. यह सुन्नी ग्रुप इराक़ी सरकार में हिस्सेदार नहीं है. जाँच शुक्रवार को संसद के विशेष सत्र में मोहम्मद हसन अवाद को श्रद्धांजलि दी गई. राजधानी बग़दाद के असाधारण सुरक्षा वाले ग्रीन ज़ोन में स्थित संसद भवन में हुए इस हमले की जाँच के आदेश दे दिए गए हैं. विशेष सत्र में संसद के स्पीकर महमूद अल मशहदानी ने कहा कि यह विशेष बैठक उन तमाम आतंकवादियों के लिए एक चुनौती है जो इराक़ में लोकतांत्रिक जीवन को रोकना चाहते हैं. संसद भवन की सुरक्षा अब आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय को सौंप दी गई है. उधर इस तरह के सवाल उठ रहे हैं कि संसद भवन के आसपास इतनी भारी सुरक्षा के बावजूद विस्फोटक सामग्री संसद भवन में किस तरह पहुँच गई. | इससे जुड़ी ख़बरें सैनिकों की तैनाती की समयसीमा बढ़ी11 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना 'इराक़ में हालात बेहद ख़तरनाक'11 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना इराक़ में आत्मघाती 'महिला' का हमला10 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना बुश ने की इराक़ पर बातचीत की पेशकश10 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना हज़ारों की संख्या में शियाओं का प्रदर्शन09 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना 'अमरीकी सैनिकों से इराक़ छोड़ने को कहें'08 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना 'इराक़ से कुछ भी सकारात्मक नहीं मिला'08 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना 'रॉकेट हमले' में 15 लोगों की मौत08 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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