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बुधवार, 11 अप्रैल, 2007 को 11:51 GMT तक के समाचार
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'इराक़ में हालात बेहद ख़तरनाक'
इराक़
आम लोग हिंसा की चपेट में हैं
अंतरराष्ट्रीय रैडक्रॉस ने कहा है कि इराक़ में आम लोगों के लिए हालात बहुत ख़राब होते जा रहे हैं जिससे जान-माल का भारी नुक़सान हो रहा है.

अंतरराष्ट्रीय रैडक्रॉस समिति ने एक ताज़ा रिपोर्ट में आहवान किया है कि इराक़ में आम लोगों को और ज़्यादा सुरक्षा की ज़रूरत है.

रैडक्रॉस की इस रिपोर्ट का शीर्षक है - सिविलियंस विदाउट प्रोटेक्शन जिसमें एक महिला का यह बयान छपा है कि हर सुबह जब लोग नींद से जागते हैं तो सड़कों पर से शव इकट्ठा करना होता है और इस काम में सभी को मदद की ज़रूरत है.

क़रीब साढ़े तीन साल पहले राजधानी बग़दाद में रैडक्रॉस के दफ़्तर पर भी बम विस्फोट हुआ था लेकिन उसके बावजूद रैडक्रॉस ने अब भी इराक़ में अपनी मौजूदगी बनाए रखी है.

इराक़ के हालात को बेहद ख़तरनाक बताते हुए रैडक्रॉस ने इस रिपोर्ट में इराक़ियों से ही सवाल उठाया है कि उनकी मदद के लिए क्या किया जा सकता है.

रैडक्रॉस के अभियान निदेशक पियर क्राएहेनबुएल का इस पर कहना था कि जवाब बहुत दुख देने वाला था.

उन्होंने कहा, "इराक़ी पुरुष, महिलाएँ और बच्चे आज दुख-दर्द के जिस दौर से गुज़र रहे हैं वो असहनीय है और उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता."

पियर क्राएहेनबुएल का कहना था, "रैडक्रॉस किसी भी तरह का प्रभाव रखने वाले सभी व्यक्तियों, नेताओं, सरकारों और संगठनों का आहवान करता है कि अब वे यह सुनिश्चित करने के लिए तेज़ी से कार्रवाई करें कि आम लोगों की ज़िंदगी की हिफ़ाज़त हो सके. अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून के तहत यह सभी की ज़िम्मेदारी है - सरकारों और ग़ैरसरकारी संस्थाओं और संगठनों, सभी की."

जेनेवा में बीबीसी संवाददाता इमोजेन फोक्स का कहना है कि अपने निष्पक्ष रुख़ के लिए मशहूर रैडक्रॉस ने इराक़ में बेहद ख़तरनाक हालात के लिए किसी भी एक पक्ष को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि इराक़ सरकार और गठबंधन सेनाओं सहित किसी भी पक्ष ने हालात को बेहतर बनाने के लिए पर्याप्त कार्रवाई नहीं की है.

'असहनीय'

रैडक्रॉस के कार्यकर्ताओं ने इराक़ में महिलाओं से उनकी ज़िंदगी के बारे में जानने के लिए उनसे विस्तृत बातचीत की.

इराक़
हिंसा का आम लोगों पर व्यापक असर पड़ रहा है

एक महिला ने कहा, "अगर कोई वाक़ई कुछ ऐसा करना चाहता है जिससे हमें मदद मिल सके तो वो ये है कि हर सुबह हमारे दरवाज़ों के सामने सड़क और गलियों में इकट्ठे होने वाले शवों को ठिकाने लगाने में हमारी मदद करे क्योंकि उन शवों को कोई भी स्थानीय व्यक्ति सुरक्षा कारणों से छूने या वहाँ से हटाने की हिम्मत नहीं जुटा पाता."

उस महिला का कहना था कि ख़ासतौर से महिलाओं को रोज़ाना अपने बच्चों को स्कूल ले जाते समय जहाँ-तहाँ बिखरे पड़े शवों का सामना करने में बड़ी परेशानी होती है और यह बर्दाश्त के बाहर है.

रैडक्रॉस का कहना है कि इराक़ में ज़िंदगी का हर पहलू बहुत मुश्किल होता जा रहा है, यहाँ तक कि बाज़ार जाना भी ज़िंदगी और मौत का सवाल बन चुका है.

रैडक्रॉस की रिपोर्ट में एक मानवीय कार्यों में सक्रिय एक व्यक्ति साद का वक्तव्य छपा है, "मुझे एक बार बम विस्फोट के घटनास्थल पर बुलाया गया तो मैंने देखा कि वहाँ चार साल का एक बच्चा अपनी माँ की लाश के पास बैठा था जो विस्फोट से क्षत-विक्षत हो गई थी. वह बच्चा अपनी मृत माँ से पूछने की कोशिश कर रहा था कि हुआ क्या है. उसकी माँ उसे एक बाज़ार में लाई थी."

रिपोर्ट में कुछ प्रमुख समस्याओं की तरफ़ ध्यान दिलाया गया -
इराक़ की स्वास्थ्य सेवाओं में कर्मचारियों और उपकरणों की भार कमी है. बहुत से डॉक्टर, नर्स और मरीज़ अस्पतालों और क्लीनिक जाने की हिम्मत ही नहीं जुटा पाते क्योंकि वे या तो निशाना बनते हैं और बहुत डरे हुए हैं.

इराक़ का जल, निकासी और बिजली ढाँचा बहुत ही ख़राब हालत में है.

कुछ इलाक़ों में खाने के सामान की कमी की भी ख़बरें हैं और कुपोषण भी बढ़ रहा है.

उधर मानवीय कार्यों में सक्रिय एक संस्था ऑक्सफ़ैम ने बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा है कि दुनिया में अच्छाई के लिए एक ताक़त के रूप में ब्रिटेन की छवि को इराक़ पर हमले और कुछ अन्य विदेश नीति फ़ैसलों से गंभीर नुक़सान पहुँचा है.

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