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ईरानी दूत का प्रताड़ना का आरोप | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गत फ़रवरी में इराक़ में अगवा किए गए एक ईरानी राजदूत जलाल शरफ़ी ने पिछले सप्ताह अपनी रिहाई के बाद शुक्रवार को कहा कि उन्हें उनके अपहर्ताओं ने प्रताड़ित किया. दूसरी ओर अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस ने इन आरोपों का खंडन किया है. उनका कहना है कि प्रताड़ित करने वालों में अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए के एजेंट भी थे. अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय ने जलाल शरफ़ी के अपहरण के पीछे अमरीका का हाथ होने से इनकार किया है और उनकी वापसी का स्वागत किया है. जलाल शरफ़ी इराक़ की राजधानी बग़दाद में ईरानी दूतावास में द्वितीय सचिव हैं. उन्होंने ईरानी मीडिया से कहा है कि सीआईए के एजेंटों ने इराक़ की स्थिति के बारे में ईरान की भूमिका के बारे में पूछताछ की. जलाल शरफ़ी के इस बयान से एक दिन पहले ही ब्रिटेन के कुछ नौसैनिकों ने अपने साथ ईरानी हिरासत में सख़्त और ख़राब बर्ताव के आरोप लगाए थे. ग़ौरतलब है कि ब्रिटेन के 15 नौसैनिकों को ईरान ने 23 मार्च को यह कहते हुए हिरासत में ले लिया था कि वे ग़ैरक़ानूनी रूप से ईरानी जलक्षेत्र घुस आए थे. जबकि ब्रिटेन का कहना रहा है कि उसके नौसैनिक इराक़ी जलक्षेत्र में थे और उन्हें ईरान ने ग़लत तरीके से हिरासत में लिया. इस मुद्दे पर ब्रिटेन और ईरान के बीच काफ़ी कूटनीतिक तकरार चली थी. शरफ़ी ने कहा कि उन्हें उनकी कार में से ही अगवा किया गया था और अगवा करने वाले लोग इराक़ी सेना की वर्दी में थे. इराक़ में अमरीकी सेना ने कहा है कि गठबंधन सेनाओं का जलाल शरफ़ी के अपहरण या उन्हें प्रताड़ित किए जाने के मामले से कुछ लेना-देना नहीं है. जलाल शरफ़ी ने ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना को बताया कि उन्हें "दिन-रात" प्रताड़ित किया गया. उन्होंने बताया, "मुझे बग़दाद की एक सड़क पर से उस समय अगवा कर लिया गया जब में कुछ ख़रीदारी कर रहा था और अगवा करने वाले लोग इराक़ी रक्षा मंत्रालय के पहचान-पत्र पहने हुए थे और वे अमरीकी सेनाओं के वाहनों में आए थे." 'ज़ख़्म दिखाए' जलाल शरफ़ी ने कहा कि उन्हें कर्रादा ज़िले से अगवा करके बग़दाद हवाई अड्डे के निकट एक ठिकाने पर ले जाया गया और अरबी और अंग्रेज़ी भाषाओं में पूछताछ की गई.
शरफ़ी ने कहा, "सीआईए के अधिकारियों के सवाल मुख्य रूप से इराक़ में ईरान की भूमिका और प्रभाव के बारे में थे. इराक़ के साथ ईरान के आधिकारिक संबंधों के बारे में जब उन्होंने मेरे जवाब सुने तो प्रताड़ना बढ़ा दी." ईरान की एफ़एआरएस समाचार एजेंसी का कहना है, "जलाल शरफ़ी ने पत्रकारों को अपने शरीर पर वे निशान दिखाए जिनके मुताबिक़ वे प्रताड़ना की वजह से बने थे और उनका इलाज किया जा रहा है." उधधर अमरीकी सैन्य प्रवक्ता लैफ़्टिनेंट कर्नल क्रिस्टोफ़र ग्रेवर ने इस मामले में गठबंधन सेनाओं की किसी भूमिका से इनकार किया है. कर्नल क्रिस्टोफ़र ग्रेवर ने कहा, "जलाल शरफ़ी अपने जिस अपहरण और प्रताड़ना की बात कर रहे हैं, उसमें इराक़ में मौजूद बहुराष्ट्रीय सेना का कोई हाथ नहीं है." इराक़ के विदेश मंत्री होशियार ज़ेबारी ने कहा कि इराक़ सरकार को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि ईरानी राजदूत जलाल शरफ़ी को किसने अगवा किया था. ग़ौरतलब है कि इराक़ के इरबील शहर से जनवरी 2007 में अमरीकी सेनाओं ने एक ईरानी वाणिज्य दूतावास पर छापा मारकर पाँच ईरानी कर्मचारियों को हिरासत में ले लिया था और इस मुद्दे पर अमरीका और ईरान के बीच ख़ासा कूटनीतिक तनाव है. अमरीका ने संदेह जताया था कि ईरानी वाणिज्य दूतावास के वे पाँच कर्मचारी इराक़ में विद्रोही गतिविधियों को सहायता दे रहे थे जबकि ईरान का कहना है कि वे कर्मचारी राजनयिक दर्जे के अधिकारी हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें ब्रितानी सैनिकों ने आपबीती सुनाई07 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना 'सैनिकों की रिहाई पर सकारात्मक रुख हो'07 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना नौसैनिकों को बंधक बनाने की जाँच शुरू06 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना नौसैनिकों ने दुर्व्यवहार की बात कही06 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना ईरान के साथ किसी सौदे का खंडन05 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना रिहाई के बाद ब्रितानी नौसैनिक लंदन पहुँचे05 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना ईरान ने ब्रितानी नौसैनिक रिहा किए04 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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