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रिहाई के बाद ब्रितानी नौसैनिक लंदन पहुँचे | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दो सप्ताह पहले ईरानी सैनिकों ने जिन ब्रितानी नौसैनिकों को अपनी जलसीमा के उल्लंघन के आरोप में गिरफ़्तार किया था, रिहाई के बाद वे तेहरान से लंदन पहुँच गए हैं. बुधवार को ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने इन सैनिकों की रिहाई की घोषणा की थी. राष्ट्रपति अहमदीनेजाद ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि नौसैनिकों की रिहाई ब्रिटेन को एक तोहफ़ा है. लंदन रवाना होने से पहले इन नौसैनिकों ने तेहरान स्थित ब्रितानी दूतावास में राजनयिकों से मुलाक़ात की. उन्होंने ईरानी टेलीविज़न से भी बात की और अपनी रिहाई के लिए धन्यवाद दिया. लेफ़्टिनेंट फ़ेलिक्स कारमैन ने कहा, "मैं ये समझ सकता हूँ कि अपनी जलसीमा में कथित प्रवेश को लेकर ईरानी जनता इतना अपमानित क्यों महसूस कर रही है." उन्होंने कहा कि उनका मक़सद ईरानी जनता को कोई नुक़सान पहुँचाना नहीं था. लेफ़्टिनेंट फ़ेलिक्स ने उम्मीद जताई कि इस अनुभव से दोनों देशों के बीच संबंध क़ायम करने में मदद मिलेगी. इन नौसैनिकों में 14 पुरुष और एक महिला है. महिला नौसैनिक सीमैन फ़ेय टर्नी ने अपनी कार्रवाई पर खेद व्यक्त किया और रिहाई के लिए धन्यवाद दिया. दोनों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके साथ अच्छा व्यवहार किया गया था. ईरान का कहना है कि इन्हें उस समय गिरफ़्तार किया गया जब वे ईरानी जलसीमा में घुस गए थे लेकिन ब्रितानी सरकार का कहना है कि नौसैनिक इराक़ी जलसीमा में थे. राहत ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने इन नौसैनिकों की रिहाई पर ख़ुशी व्यक्त की है और कहा है कि इन लोगों के परिवारवालों को इससे काफ़ी राहत मिलेगी.
दूसरी ओर ईरानी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने कहा है कि इन नौसैनिकों की रिहाई के लिए ब्रितानी सरकार ने कोई रियायत नहीं दी है लेकिन वादा ज़रूर किया है कि ऐसी घटना दोबारा नहीं होगी. बुधवार को एक संवाददाता सम्मेलन में ईरान के राष्ट्रपति ने इसे दोहराया कि ब्रितानी नौसैनिकों ने ईरानी जलसीमा का उल्लंघन किया था. हालाँकि ब्रिटेन का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के तहत उसके नौसैनिक इराक़ी जलसीमा में थे. ब्रिटेन का आरोप है कि नौसैनिकों ने ईरानी जलसीमा में घुसने की बात दबाव में स्वीकार की थी. ईरान में ब्रिटेन के राजदूत रह चुके सर रिचर्ड डॉल्टन का कहना है कि इस मामले से ईरान की छवि ख़राब हुई है. लेकिन संयुक्त राष्ट्र में अमरीका के पूर्व राजदूत जॉन बोल्टन का कहना है कि इस मामले में ईरान के राष्ट्रपति अहमदीनेजाद विजेता के रूप में सामने आए हैं और उन्होंने परमाणु हथियार को लेकर अपने पक्ष को और मज़बूत किया है. | इससे जुड़ी ख़बरें ईरान ने ब्रितानी नौसैनिक रिहा किए04 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना नौसैनिकों पर 'ईरान में मुक़दमा नहीं'02 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना बंधकों की अदला-बदली से इनकार31 मार्च, 2007 | पहला पन्ना ईरान का 'अक्षम्य व्यवहार' निंदनीय : बुश31 मार्च, 2007 | पहला पन्ना नौसैनिकों का मुद्दा यूरोपीय संघ में उठेगा30 मार्च, 2007 | पहला पन्ना ईरान ने संयुक्त राष्ट्र की अपील ठुकराई30 मार्च, 2007 | पहला पन्ना नौसैनिकों से मिल पाएँगे ब्रितानी अधिकारी 29 मार्च, 2007 | पहला पन्ना ब्रिटेन के ईरान से द्विपक्षीय रिश्ते स्थगित28 मार्च, 2007 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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