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ईरान ने संयुक्त राष्ट्र की अपील ठुकराई | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईरान ने बंदी बनाए गए पंद्रह ब्रितानी नौसैनिकों को रिहा करने की संयुक्त राष्ट्र की अपील ठुकरा दी है. संयुक्त राष्ट्र में ईरानी मिशन का कहना है कि इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र या किसी तीसरे पक्ष को बीच में पड़ने की ज़रूरत नहीं है और इस मसले को ब्रिटेन के साथ द्विपक्षीय स्तर पर सुलझाना चाहिए. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पंद्रह ब्रितानी नौसैनिकों को ईरान द्वारा बंदी बनाए जाने पर 'गंभीर चिंता' व्यक्त करते हुए उनकी अविलंब रिहाई की माँग की है. इस बयान में यह भी माँग की गई है कि बंदी बनाए गए नौसैनिकों से ब्रितानी अधिकारियों को मिलने की अनुमति दी जाए. ब्रिटेन सुरक्षा परिषद से और भी कड़ा बयान चाहता था लेकिन रुस और कुछ अन्य सदस्यों ने इसका विरोध किया. ब्रिटेन चाहता था कि सुरक्षा परिषद के बयान में ईरान की 'निंदा' की जाए और नौसैनिकों की तुरंत रिहाई की माँग हो लेकिन ऐसा नहीं हुआ. हालाँकि संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन के राजदूत एमिर जोन्स पैरी ने इस बयान पर संतोष प्रकट किया है. इस बीच ईरान ने बंधक बनाए गए नौसैनिक फेय टर्नी का एक पत्र जारी किया है जिसमें ब्रिटेन से इराक से सेना वापस बुलाने की अपील की गई है. संयुक्त राष्ट्र में अमरीका के राजदूत ने कहा कि इस संबंध में की गई वार्ताएँ सुरक्षा परिषद की बेहतरीन वार्ताएं नहीं कही जा सकती हैं. उल्लेखनीय है कि इन वार्ताओं में सदस्य देशों के बीच तीन वाक्यों पर चार घंटे से अधिक की बहस हुई. उधर संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत का कहना है कि ब्रिटेन ने इस मामले में संयुक्त राष्ट्र समेत किसी तीसरे दल को शामिल करके मामला और उलझा दिया है. उनका कहना था कि यह मामला द्विपक्षीय स्तर पर सुलझाया जाना चाहिए. ब्रिटेन का कहना है कि उसके नौसैनिक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के निर्देशों के तहत ही इराक़ी समुद्र में थे जबकि ईरान का कहना है कि जब ब्रितानी नौसैनिकों को पकड़ा गया वो ईरान की समुद्री सीमा में थे. रिश्ते स्थगित इससे पहले ब्रितानी विदेश मंत्री मार्ग्रेट बैकेट ने संसद में घोषणा की है कि उनका देश ईरान के साथ सभी तरह के द्विपक्षीय संबंधों को स्थगित कर रहा है. उन्होंने कहा कि यह स्थिति तब तक बनी रहेगी जब तक ईरान बंदी बनाए गए 15 ब्रितानी नौसैनिकों को रिहा नहीं कर देता. ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने ईरान की इस कार्रवाई को 'ग़लत, ग़ैर क़ानूनी और अस्वीकार्य' बताया है. टोनी ब्लेयर ने संसद में कहा कि अब समय आ गया है जब ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाए जाने की ज़रूरत है. इस बीच ईरान की ओर से जारी किए गए ताज़ा बयान में कहा गया है कि मामले को सहयोग और बातचीत के ज़रिए सुलझाया जा सकता है. इससे पहले ब्रितानी रक्षा मंत्रालय ने इस बात के सबूत जारी किए थे कि उसके नौसैनिक इराक़ी जल सीमा के भीतर थे न कि ईरानी सीमा में. ब्रितानी रक्षा मंत्रालय ने ग्लोबल पोज़िशनिंग सिस्टम के आँकड़े जारी किए हैं और दावा किया है कि उनका जहाज़ इराक़ी जल सीमा के दो मील भीतर ही था जब उनके नौसैनिकों को बंधक बनाया गया. |
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