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ईरान पर प्रतिबंधों के प्रस्ताव पर सहमति | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
परमाणु कार्यक्रम न रोकने के कारण ईरान के ख़िलाफ़ और आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाने के नए प्रस्ताव पर सुरक्षा परिषद के पाँच स्थाई सदस्यों और जर्मनी के बीच सहमति बन गई है. यह प्रस्ताव अब गुरुवार को सुरक्षा परिषद के सामने चर्चा के लिए रखा जाएगा. हालांकि ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों के लिए है लेकिन पश्चिमी देशों का कहना है कि ईरान परमाणु बम बनाना चाहता है. संयुक्त राष्ट्र ने ईरान से परमाणु कार्यक्रम रोकने को कहा था और इसके लिए उसे समय सीमा दी गई थी लेकिन ईरान ने ऐसा करने से इनकार कर दिया. उल्टे ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने कहा है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम ऐसी गाड़ी है जिसमें न ब्रेक है और न रिवर्स गियर. प्रतिबंध ईरान के ख़िलाफ़ नए प्रतिबंधों के प्रस्ताव पर सहमति बुधवार की शाम को बनी. जिन देशों के बीच ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंध को लेकर सहमति बनी है उनमें सुरक्षा परिषद के पाँच सदस्यों अमरीका, फ़्रांस, चीन, रुस, ब्रिटेन के अलावा जर्मनी भी शामिल है. नए प्रस्ताव में जिन प्रतिबंधों का प्रावधान किया गया है, उनमें ऐसे व्यक्तियों की किसी भी देश में यात्रा पर रोक शामिल है जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम के लिए कार्य कर रहे हैं. इस प्रस्ताव में ईरान से हथियार ख़रीदने और उसे ख़ास तरह के हथियार बेचने पर रोक लगाए जाने की बात कही गई है. इसके अलावा सरकारों से अपील की गई है कि वह ईरान को कोई आर्थिक सहायता न दे. लेकिन राष्ट्रपति अहमदीनेजाद ने हमेशा की तरह एक बेफ़िक्र सा बयान दिया है. उन्होंने बुधवार को मध्य ईरान में एक आमसभा में कहा है कि प्रतिबंध लगाकर ईरान को अलग-थलग करने की पश्चिमी देशों की कोशिश नाकाम हो जाएगी. उन्होंने कहा है कि ऐसी कोई भी कोशिश आख़िरकार विश्व शक्तियों को ही दरकिनार करेगी. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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