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शनिवार, 23 दिसंबर, 2006 को 09:56 GMT तक के समाचार
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'अमरीका के कारण पाइपलाइन अधर में'
गैस पाइप लाइन
पाइप लाइन पर आठ अरब डॉलर का ख़र्च आने का अनुमान है
अमरीका में पाकिस्तान के राजदूत महमूद अली दुर्रानी ने कहा है कि अगर अमरीका इसी तरह रोड़े अटकाता रहा तो ईरान से पाकिस्तान होकर भारत जाने वाला पाइप लाइन कभी ना बन पाए.

समाचार एजेंसी एपी को दिए एक विशेष इंटरव्यू में दुर्रानी ने कहा कि अगर अमरीका ईरान के साथ अपने रिश्तों के कारण इस गैस पाइप लाइन परियोजना पर आपत्ति करता रहा तो परियोजना खटाई में पड़ सकती है.

दुर्रानी ने कहा कि अमरीका की आपत्ति के अलावा गैस की क़ीमत को लेकर पाकिस्तान और ईरान में भी मतेभेद हैं और इसका भी उल्टा असर इस परियोजना पर पड़ सकता है.

इस परियोजना को लेकर भारत की भी कुछ चिंताएँ हैं. भारत पाकिस्तान से होकर आने वाली पाइप लाइन की सुरक्षा को लेकर चिंतित है लेकिन पाकिस्तानी राजदूत ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की.

 अगर अमरीका ईरान के साथ अपने रिश्तों के कारण इस गैस पाइप लाइन परियोजना पर आपत्ति करता रहा तो परियोजना खटाई में पड़ सकती है
महमूद अली दुर्रानी

इस परियोजना के तहत पाइप लाइन का बड़ा हिस्सा (2600 किलोमीटर) पाकिस्तान से होकर गुजरेगा. पाकिस्तानी राजदूत दुर्रानी ने कहा कि अगर अमरीका की आपत्ति के कारण परियोजना नहीं पूरी होती, तो अमरीका को ही देश की ऊर्जा ज़रूरतों के लिए अन्य रास्ता निकालने में मदद करनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि ना तो पाकिस्तान और ना ही भारत इस गैस पाइप लाइन परियोजना के लिए अमरीका के साथ अपने रिश्तों की बलि चढ़ाना चाहेंगे.

चिंता

महमूद दुर्रानी ने कहा कि दोनों देश इस मामले पर सावधान रहेंगे क्योंकि अमरीका उनका एक अहम सहयोगी देश है.

भारत-अमरीका परमाणु समझौते से पाकिस्तान को थोड़ी चिंता है

अगर ये अहम परियोजना पर काम पूरा हो गया तो एक दिन में इस पाइप लाइन से होकर 5.2 अरब क्यूबिक फीट गैस भेजी जा सकेगी. इस परियोजना के पूरा होने में आठ अरब अमरीकी डॉलर का ख़र्च लग सकता है.

दरअसल अमरीका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंतित है और उसके ख़िलाफ़ पाबंदी के लिए वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव भी लेकर आया है.

अमरीका और भारत के बीच परमाणु समझौते को लेकर महमूद दुर्रानी ने कहा कि पाकिस्तान को इस पर कुछ चिंता है लेकिन पाकिस्तान इसे लेकर भयभीत नहीं है.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को इस बात की चिंता है कि कहीं भारत मिलने वाले परमाणु ईंधन को अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम में ना लगा दे.

महमूद दुर्रानी ने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि अमरीका पाकिस्तान के साथ उसी तरह का परमाणु समझौता करने को तैयार नहीं जैसा उसने भारत के साथ किया है.

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