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बुधवार, 03 अगस्त, 2005 को 13:00 GMT तक के समाचार
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पाइप लाइन पर भारत-ईरान बैठक
अय्यर और वक़ार
भारत और पाकिस्तान के बीच पहले इस परियोजना पर चर्चा हो चुकी है
ईरान-पाकिस्तान-भारत गैस पाइप लाइन पर भारत और ईरान के अधिकारियों के बीच एक बैठक दिल्ली में चल रही है.

इस बैठक में पाइप लाइन के तकनीकी, वित्तीय, व्यावसायिक और क़ानूनी पहलुओं पर चर्चा हो रही है.

ईरान के पेट्रोलियम उपमंत्री नेजाद होसेनियान और भारत के पेट्रोलियम सचिव सुशील त्रिपाठी के बीच बुधवार को इस संबंध में चर्चा हुई है.

इससे पहले इस परियोजना को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच बने एक संयुक्त कार्यदल की बैठक हो चुकी है.

इस बैठक में दोनों देशों के बीच वित्तीय सलाहकार समिति का गठन करने का फ़ैसला किया गया था.

भारत के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकारी तलमीज़ अहमद ने कहा है कि भारत-पाकिस्तान और ईरान ने फ़ैसला किया था कि तीनों देश आपस में चर्चा करते रहेंगे ताकि हर मुद्दे पर बात स्पष्ट हो सके.

उन्होंने बीबीसी को बताया कि ईरान ने इस परियोजना के व्यावसायिक और तकनीकी पहलू को लेकर एक रिपोर्ट तैयार की है और इसकी व्यावहारिकता पर भारत को विचार करना है.

तलमीज़ अहमद ने कहा, "हम अपने सलाहकारों से चर्चा करने के बाद इस रिपोर्ट में अपनी ज़रूरत की बातें जोड़ेंगे."

इस बैठक के बाद मंत्री स्तर की बैठक होनी है.

सवाल

हालांकि तीनों देश अपने अपने स्तर पर इस परियोजना को लेकर प्रतिबद्धता दिखा रहे हैं लेकिन इसे लेकर कई सवाल हैं.

 ईरान में इस बात को लेकर आम सहमति नहीं है कि तेल बेचा जाए या गैस बेची जाए
तलमीज़ अहमद

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत इस पाइल लाइन को लेकर कोई समय सीमा तय करने की जल्दबाज़ी नहीं दिखा रहा है क्योंकि वह पाकिस्तान में सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं.

दूसरा बड़ा सवाल ईरान के अंदरूनी मामले को लेकर है. जैसा कि तलमीज़ अहमद ने कहा कि ईरान में इस बात को लेकर आम सहमति नहीं है कि तेल बेचा जाए या गैस बेची जाए.

उनका कहना है कि आमतौर पर लोग चाहते हैं कि तरलीकृत प्राकृतिक गैस की जगह तेल बेचा जाए.

फिर एक सवाल ईरान में सरकार बदलने को लेकर भी उठाया गया है, हालांकि आश्वासन है कि सरकार बदलने से पाइप लाइन परियोजना पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है.

इस बीच पाकिस्तान और ईरान एक समझौता पत्र पर हस्ताक्षर कर चुके हैं और भारत पाकिस्तान के बीच एक संयुक्त कार्यदल गठित हो चुका है.

लेकिन अब तक भारत और ईरान के बीच कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ है.

भारत इस समय अपनी ज़रुरत से आधे प्राकृतिक गैस का उत्पादन करता है और 70 प्रतिशत कच्चे तेल का आयात करता है.

परियोजना

गैस पाइपलाइन
इस परियोजना पर अमरीका ऐतराज़ जता चुका है

ईरान-पाकिस्तान-भारत गैस पाइपलाइन की कुल लंबाई 2600 किलोमीटर की है जिसमें से 760 किलोमीटर पाकिस्तान से होकर गुज़रेगा.

इसकी कुल लागत साढ़े सात करोड़ अरब अमरीकी डॉलर है.

वर्ष 2009-10 तक इस परियोजना के पूरे हो जाने की संभावना है.

परियोजना पूरी हो जाने के बाद इससे 15 करोड़ क्यूबिक मीटर गैस प्रतिदिन मिलेगी जिसमें से एक तिहाई गैस का उपयोग पाकिस्तान करेगा और शेष का उपयोग भारत करेगा.

पाकिस्तान के पेट्रोलियम सचिव वकार के अनुसार पाकिस्तान और ईरान के बीच पिछले हफ़्ते एक समझौता पत्र पर हस्ताक्षर हुए हैं जिसमें बाद में भारत को भी शामिल कर लिया जाएगा.

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