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इसराइली शहर में रॉकेट हमले | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इसराइली अधिकारियों ने कहा है कि सदेरोत शहर में एक फ़लस्तीनी रॉकेट हमले में एक महिला की मौत हो गई और एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया है. इसराइली पुलिस ने कहा है कि सदेरोत शहर के भीतर और बाहर छह रॉकेट गिरे. यह शहर फ़लस्तीनी शहर ग़ज़ा की सीमा से मिलता है जो इसराइली के दक्षिणी हिस्से में है. इसराइली सेना इस तरह के रॉकेट हमले रोकने के प्रयासों के तहत ग़ज़ा क्षेत्र में हाल के महीनों में कार्रवाई करती रही है जिनमें अनेक फ़लस्तीनी मारे गए हैं. पिछले सप्ताह फ़लस्तीनी शहर बेत हनौन में एक इसराइली हमले में 19 आम फ़लस्तीनी मारे गए थे. इसराइली सेना ने उस हमले को तकनीकी नाकामी का नतीजा बताया था. बुधवार को इसराइली शहर सदेरोत पर हुए रॉकेट हमले की ज़िम्मेदारी स्वीकार करने के बारे में अनेक दावे सामने आए हैं. सत्तारूढ़ हमास के एक सशस्त्र गुट ने भी इस हमले की ज़िम्मेदारी लेते हुए कहा है कि बेत हनौन में आम फ़लस्तीनियों की मौत का बदला लेने के लिए ये रॉकेट हमले किए गए हैं. उधर इसराइली रक्षा मंत्री आमिर पेरेट्ज़ ने चेतावनी देते हुए कहा है कि सदेरोत शहर पर रॉकेट हमले करने वालों को भारी क़ीमत चुकानी पड़ेगी. आमिर पेरेट्ज़ ने कहा, "इन संगठनों को भारी क़ीमत चुकानी पड़ेगी. जो भी इन रॉकेट हमलों के लिए ज़िम्मेदार हैं, हम उनके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करेंगे और यह कार्रवाई उनके नेताओं से लेकर निचले स्तर तक सक्रिय चरमपंथियों तक हो सकती है." सदेरोत रक्षा मंत्री आमिर पेरेट्ज़ का गृह नगर है और जो 20 वर्षीय व्यक्ति इन रॉकेट हमलों में ज़ख़्मी हुआ है वह एक निजी सुरक्षा कंपनी का सदस्य है और रक्षा मंत्री के निवास की सुरक्षा के लिए तैनात है. दहशत कहा जाता है कि फ़लस्तीनी चमरंपथी ग़ज़ा से क़ासम नामक रॉकेट लगभग हर दिन इसराइली इलाक़ों में दागते हैं लेकिन उनसे मुश्किल से ही किसी की मौत या कोई ज़ख़्मी होता है लेकिन उनसे दहशत ज़रूर फैल जाती है.
क़ासम नामक रॉकेटों से पहली मौत जून 2004 में हुई थी और तब से अब तक इसराइल में कुल मिलाकर नौ लोगों की मौत होने की बात कही गई है और उनमें सभी आम लोग थे. अब से पहले क़ासम नामक फ़लस्तीनी रॉकेट से इसराइल में किसी व्यक्ति की मौत की पुष्टि की गई थी तो वह जुलाई 2005 में की गई थी. इसराइल ग़ज़ा में अपनी सैन्य कार्रवाइयों के लिए एक प्रमुख कारण यही बताता है कि वहाँ से रॉकेट इसराइली इलाक़ों में दागे जाते हैं. जून 2006 से अभी तक ग़ज़ा पट्टी क्षेत्र में इसराइली सैन्य कार्रवाई में लगभग 400 फ़लस्तीनी मारे जा चुके हैं जिनमें ज़्यादातर आम लोग थे. | इससे जुड़ी ख़बरें अरब देशों की प्रतिबंध तोड़ने की घोषणा12 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना 'दिसंबर तक राष्ट्रीय एकता सरकार संभव'11 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना हानिया ने इस्तीफ़ा देने की पेशकश की10 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना हमास और फ़तह समझौते के क़रीब06 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना इसरायली हमलों में 18 फ़लस्तीनी मारे गए08 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना हमास की सरकार के समर्थन में रैली06 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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