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ब्रितानी जनरल अपने बयान पर अटल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन के सेना प्रमुख सर रिचर्ड डैनेट ने इराक़ से ब्रितानी सैनिक शीघ्र ही वापस बुलाए जाने संबंधी अपने बयान की हिमायत की है. जनरल सर रिचर्ड डैनेट ने शुक्रवार को बीबीसी से बातचीत में कहा कि सेना के लिए जो अच्छा है उसके समर्थन में बोलना उनका मक़सद था लेकिन उन्होंने इस बात से इनकार किया कि सरकार के साथ उनके कोई मतभेद हैं. सर रिचर्ड डैनेट ने गुरूवार को ब्रिटेन के एक अख़बार डेली मेल से बातचीत में कहा था कि इराक़ में ब्रितानी सैनिकों की मौजूदगी की वजह से सुरक्षा संबंधी समस्याएँ बढ़ी हैं और ब्रितानी सैनिकों को निकट भविष्य में वहाँ से बुला लिया जाना चाहिए. उधर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कार्यालय 10 डाउनिंग स्ट्रीट ने कहा है कि इराक़ में ब्रितानी सैनिक वहाँ की सरकार के अनुरोध पर संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के तहत तैनात हैं. इस बीच युद्ध विरोधी कार्यकर्ताओं ने सर रिचर्ड डैनेक की इस टिप्पणी का स्वागत करते हुए कहा है और इस तरह का बयान देने के लिए उनकी तारीफ़ भी की है. ब्रिटेन के विपक्षी दलों ने हालाँकि यह दावा किया है कि जनरल सर रिचर्ड डैनेट के खंडन के बावजूद उनकी टिप्पणी से नज़र आता है कि सरकारी नीति से वह सहमत नहीं है. कंज़रवेटिव पार्टी के आंतरिक मामलों के प्रवक्ता पैट्रिक मर्सर ने कहा कि जनरल रिचर्ड की टिप्पणी से सरकार के मामले में एक कठिन माहौल पैदा हो गया है, उधर लिबरल डैमोक्रेट नेता मेंज़ीज़ कैम्पबेल ने कहा कि जनरल डैनेट का रुख़ प्रधानमंत्री के रुख़ से नाटकीय तरीके से उल्टा है और सरकार को उनकी बात सुननी ही होगी. 'हू हा' सर रिचर्ड ने शुक्रवार को बीबीसी के रेडियो 4 के टुडे कार्यक्रम में कहा कि डेली मेल में उनके जो विचार छपे हैं उनमें कुछ ख़ास नया नहीं है और न ही ऐसा कुछ है जिससे कोई बड़ी ख़बर बने.
सर रिचर्ड डैनेट ने कहा, "इस तरह की हू हा का माहौल बनाने का मेरा कोई इरादा नहीं रहा है और डेली मेल में मेरा इंटरव्यू छपने के बाद रात भर में लोगों ने जिसका आनंद उठाया है कि सेना अध्यक्ष के रूप में मेरे और प्रधानमंत्री या फिर मेरे और रक्षा उप मंत्री के साथ शायद मेरे कोई मतभेद हैं." सर रिचर्ड डैनेट ने इस पर भी स्पष्टीकरण दिया कि इराक़ से ब्रितानी सैनिकों को निकट भविष्य में वापस बुलाए जाने से उनका क्या मतलब था. उन्होंने कहा, "हमारे सैनिक क़रीब साढ़े तीन साल से इराक़ में तैनात हैं जोकि ख़ासी लंबी समयावधि है और इसी वजह से हम पर एक ख़ास क़िस्म का दबाव भी है, दरअसल इससे हमारे सहयोगी देशों पर भी दबाव है कि जब भी मिशन ठोस तरीके से पूरा हो जाए तो हमारे सैनिकों को तुरंत वापस आ जाना चाहिए." सर रिचर्ड डैनेट ने कहा, "हम नहीं चाहते कि हमारे सैनिक इराक़ में और दो, तीन, चार या पाँच साल रहें. हमें एक तार्किक समयावधि के संदर्भ में सोचना होगा." उन्होंने कहा कि इराक़ में ब्रितानी सैनिक अपने मिशन में कामयाब हो रहे हैं और दक्षिणी इराक़ में जिन चार प्रांतों की ज़िम्मेदारी उन पर थी उनमें से दो प्रांत इराक़ियों के नियंत्रण में सौंपे जा चुके हैं. सर रिचर्ड डैनेट ने कहा कि बाक़ी दो प्रांतों में हालात में सुधार हो रहा है जिसका मतलब है कि हमारी सैनिक ज़िम्मेदारियों में कमी आ रही है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'इराक़ से ब्रितानी सेना वापस लौटे'12 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना अमरीका की इराक़ नीति पर पुनर्विचार07 अक्तूबर, 2006 | पहला पन्ना हमले का ख़तरा बरकरार - रिपोर्ट27 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना इराक़ युद्ध से आतंकवाद बढ़ा:रिपोर्ट26 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना संघीय ढांचे पर सुन्नियों की शर्त23 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना इराक़ गृह युद्ध के कगार पर-अन्नान18 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना 'इराक़ पर हमला संकट लेकर आया'13 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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