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बुधवार, 11 अक्तूबर, 2006 को 09:23 GMT तक के समाचार
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नेपोलियन की मौत कैसे हुई?

नेपोलियन बोनापार्ट
नेपोलियन बोनापार्ट की एक तस्वीर
ग्राम पथराही, ज़िला मधुबनी बिहार से परवेज़ आलम ख़ान ये जानना चाहते हैं कि नेपोलियन की मौत कैसे हुई.

फ़्रांस के सम्राट नेपोलियन बोनापार्ट की मौत को लेकर तरह-तरह की बातें कही जाती रही हैं लेकिन अधिकांश इतिहासकार ये मानते हैं कि उनकी मौत का कारण पेट का कैंसर था. वॉटरलू की लड़ाई में हार जाने के बाद नेपोलियन को 1821 में सेन्ट हैलेना द्वीप निर्वासित कर दिया गया था जहाँ 52 साल की उम्र में उनकी मृत्यु हो गई. लेकिन सन 2001 में फ़्रांसीसी विशेषज्ञों ने नेपोलियन के बाल का परीक्षण करके पाया कि उसमें आर्सनिक नामक ज़हर था. ये कहा गया कि संभवत सेन्ट हैलेना के तत्कालीन ब्रिटिश गवर्नर ने फ़्रांस के काउंट के साथ मिलकर नेपोलियन की हत्या की साज़िश रची. फिर अमरीकी वैज्ञानिकों ने बिल्कुल ही अलग व्याख्या की. उन्होंने कहा कि नेपोलियन की बीमारी का जो उपचार किया गया उसी ने उन्हें मार दिया. उन्हें नियमित रूप से पोटेशियम टार्ट्रेट नामक ज़हरीला नमक दिया जाता था जिससे वो उलटी कर सकें और ऐनिमा लगाया जाता था. इससे उनमें पोटेशियम की कमी हो गई जो कि दिल के लिए घातक होती है. नेपोलियन को उनकी आंतों की सफ़ाई के लिए 600 मिलिग्राम मरक्यूरिक क्लोराइड दिया गया और दो दिन बाद उनकी मृत्यु हो गई.

मोरडेचाई ब्राउन कौन थे, दुर्गापुर उड़ीसा से ज्योतिरंजन बिस्वाल.

मोरडेचाई ब्राउन अमरीका के प्रसिद्ध बेसबॉल खिलाड़ी थे. उनका खिलाड़ी जीवन 1903 से 1916 तक रहा जिसमें उन्होंने कई जीत हासिल कीं और दो बार विश्व सीरीज़ चैम्पियनशिप के हिस्सेदार रहे. किशोरावस्था में एक मशीनी दुर्घटना में उनके हाथ की दो उंगलियों के हिस्से कट गए थे जिससे उन्हें गेंद फेंकने में लाभ मिलता था. मोरडेचाई ब्राउन थ्री फ़िंगर के नाम से मशहूर हुए.

आंसू में कौन कौन से तत्व पाए जाते हैं. ये आँख की किस ग्रंथि से निकलते हैं और किस प्रकार आँख को संक्रमण से बचाते हैं, उफरैल, अररिया बिहार से एम एस देवराज.

आँख
आँसू आँख की रक्षा करते हैं

आंसू में 98 प्रतिशत पानी, कई प्रकार के इलैक्ट्रोलाइट और 45 क़िस्म के प्रोटीन होते हैं. इनमें इम्यूनोग्लोबुलिन्स नामक प्राकृतिक प्रोटीन भी शामिल हैं जो विभिन्न बैक्टीरिया और वायरस से आंखों की रक्षा करते हैं. हमारी आंखों के ऊपर लैक्रिमल ग्रन्थियां होती हैं जिनसे यह तरल पदार्थ निरंतर निकलता रहता है. इसका मुख्य उद्देश्य होता है आँख को तर रखना. जब कभी आँख में कुछ गिर जाता है तो आंसू अधिक निकलते हैं जिससे आँख की सफ़ाई हो सके. जब हम दुःखी होते हैं तो लैक्रिमल ग्रन्थियों के पास की मांसपेशियां खिंचने लगती हैं और आंसू निकलने लगते हैं. अधिक हंसने से भी यही होता है.

विश्व का सबसे बड़ा गिरजाघर कहाँ है, पूछा है मिरदौल, अररिया बिहार से धीरेन्द्र मंडल एवं देवराज ने.

दुनिया का सबसे बड़ा गिरजाघर अफ़्रीकी देश आइवरी कोस्ट की प्रशासनिक राजधानी यमूसूक्रो में है. इसे बसीलिका ऑफ़ आवर लेडी ऑफ़ पीस ऑफ़ यमूसूक्रो के नाम से जाना जाता है. इसकी आधारशिला पोप जॉन पॉल द्वितीय ने रखी थी और 30 करोड़ अमरीकी डॉलर की लागत से इसका निर्माण 1989 में पूरा हुआ. यह 30 हज़ार वर्ग मीटर क्षेत्र में बना है. इसके गुंबद की ऊँचाई 518 फ़िट है. इसके निर्माण के लिए इटली से संगमरमर और फ़्रांस से स्टेन ग्लास मंगाया गया. इसमें 7000 लोगों के बैठने और अन्य ग्यारह हज़ार के खड़े होने की जगह है.

बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के ज़रिए बड़ोदा गुजरात से हमें विदित जैन ने सवाल लिखकर भेजा है कि जी डी पी या सकल घरेलू उत्पाद क्या होता है.

सकल घरेलू उत्पाद का मतलब है किसी देश में एक तय अवधि के भीतर दी गई सेवाओं और उत्पादों का कुल मूल्य, यानी उसकी आर्थिक हैसियत क्या है. जैसे किसी परिवार की हैसियत जानने के लिए उसके सदस्यों की आय, मकान की क़ीमत, बैंक खाते, ज़ेवर आदि की कुल क़ीमत का अंदाज़ा लगाया जाता है उसी तरह किसी देश की अर्थव्यवस्था का आकार सकल घरेलू उत्पाद पर निर्भर करता है. इसके तीन घटक होते हैं कृषि उत्पाद, औद्योगिक उत्पाद और सेवाएँ.

शब्बीर खन्ना ने पूछा है कि क्या भारत में कोई ऐसा क़ानून है जो कहता है कि कोई मुसलमान देश का प्रधानमंत्री नहीं बन सकता.

मनमोहन सिंह
मनमोहन सिंह अल्पसंख्यक समुदाय से पहले प्रधानमंत्री हैं

जी नहीं. भारत एक धर्म निरपेक्ष देश है और भारतीय संविधान के अनुसार हर नागरिक को समान अधिकार प्राप्त हैं. प्रधान मंत्री का पद आमतौर पर उस दल या गठबंधन के नेता को दिया जाता है जिसने संसदीय चुनाव में बहुमत हासिल किया हो. प्रधान मंत्री होने के लिए ज़रूरी है कि वह व्यक्ति संसद के किसी भी सदन का सदस्य हो या नियुक्ति के छह महीने के भीतर सदस्य चुन लिया जाए. कोई भी वयस्क व्यक्ति संसद की सदस्यता के लिए चुनाव लड़ सकता है अगर वह भारतीय नागरिक है, उसने किसी अन्य देश की नागरिकता स्वीकार नहीं की है, उसकी दिमाग़ी हालत सही है, वह किसी सरकारी विभाग का कर्मचारी नहीं है और उसे संसद के किसी क़ानून के तहत अयोग्य घोषित नहीं किया गया है.

जोधपुर राजस्थान से बिनोद कुमार पूछते हैं कि 1962 और 1971 में भारत के प्रतिरक्षा मत्री कौन थे.

1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान भारत के प्रतिरक्षा मंत्री थे वी के कृष्णामैनन और 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय यह पद बाबू जगजीवन राम के पास था.

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