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चमगादड़ उल्टे क्यों लटकते हैं? | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जगरनाथपुर मधुबनी बिहार से लालबाबू सिंह पूछते हैं कि चमगादड़ उल्टे क्यों लटके रहते हैं. लालबाबू जी इसका कारण ये है कि उल्टे लटके रहने से चमगादड़ बड़ी आसानी से उड़ान भर सकते हैं. अन्य पक्षियों की तरह वो ज़मीन से उड़ान नहीं भर पाते, क्योंकि उनके पंख भरपूर उठान नहीं देते और उनके पिछले पैर इतने छोटे और अविकसित होते हैं कि वो दौड़ कर गति नहीं पकड़ पाते. चमगादड़ आमतौर पर अंधेरी गुफ़ाओं में दिनभर आराम करते हैं, सोते हैं और रात को ही निकलते हैं. ये सोते हुए गिर क्यों नहीं जाते इसका कारण ये है कि चमगादड़ के पैरों की नसें इस तरह व्यवस्थित हैं, कि उनका वज़न ही उनके पंजों को मज़बूती के साथ पकड़ने में मदद करता है. अफ़ज़ल ख़ान कौन थे और उनका शिवाजी से क्या संबंध था. पूछते हैं ग्राम जगरनाथपुर मधुबनी बिहार से लालबाबू सिंह. अफ़ज़ल ख़ान बीजापुर के सुल्तान अली आदिलशाह द्वितीय के सेनाप्रमुख थे. छत्रपति शिवाजी और उनके सैनिकों ने पश्चिमी घाट और कोंकण तट के कई क़िलों पर हमला करके उनपर क़ब्ज़ा कर लिया था. बीजापुर के सुल्तान ने शिवाजी को चेतावनी दी कि वो अपनी हरकतों से बाज़ आएं, लेकिन उन्होने उसपर कान नहीं धरे. फिर सुल्तान ने शिवाजी को पकड़ने के लिए अफ़ज़ल ख़ान को भेजा. कहते हैं कि अफ़ज़ल ख़ान ने शिवाजी का गढ़ भेदने की कोशिश की लेकिन सफल न हुए. आख़िरकार दोनों मिलने को तैयार हुए. अफ़ज़ल ख़ान बड़े डील डौल का आदमी था उसने शिवाजी को गले लगाने के बहाने मारने की कोशिश की. शिवाजी भी पूरी तैयारी के साथ गए थे, उन्होने बघनखे से उसे मार डाला. पिछले साल प्रसारित हुए नाटक को सुनकर ग्राम दिबरा धनी, पूर्णियां बिहार से गौरव कुमार गंगा ने पूछा है कि टी आर पी रेटिंग क्या होती है.
टी आर पी का मतलब है टेलिविज़न रेटिंग पौइन्ट्स. एक तरह से ये टेलिविज़न कार्यक्रमों की लोकप्रियता मापने का तरीक़ा है जिसमें विभिन्न कार्यक्रमों को अंक दिये जाते हैं. ये काम टेलिविज़न ऑडिएन्स मैज़रमैंट संस्था करती है. होता ये है कि टैम देश भर में कई छोटे बड़े शहरों का चयन करके उसमें विभिन्न वर्ग के लोगों के घर तलाश करती है और फिर उनके टेलिविज़न पर एक मीटर लगाती है. ये एक छोटा सा काला बक्सा होता है जो ये नोट करता है कि आपने कब कितनी देर कौन से टेलिविज़न चैनल का कौन सा कार्यक्रम देखा. महीने के अंत में ये आंकडे जुटाकर उनका विश्लेषण किया जाता है और उससे पता चलता है कि कौन सा कार्यक्रम कितना लोकप्रिय है. अंतरिक्ष में जाने वाला विश्व का प्रथम व्यक्ति कौन है. जानना चाहते हैं कटिहार बिहार से राकेश कुमार रॉय. सबसे पहले अंतरिक्ष की यात्रा की रूस के करनल यूरी ऐलैक्सेविच गगारिन ने. यूरी का जन्म 1934 में एक साधारण कृषक परिवार में हुआ था. उन्होने विमान चालन का प्रशिक्षण लिया और 1967 में ज़ुकोव्स्की एयर फ़ोर्स इंजीनियरिंग ऐकेडमी से डिग्री हासिल की. फिर वौस्तौक वन अंतरिक्षयान के चालक के रूप में 12 अप्रैल 1961 को यूरी गगारिन ने पृथ्वी की कक्षा का 108 मिनट तक चक्कर लगाया. यात्रा से लौटकर उन्होने जिन शब्दों में काले आकाश, चमकदार सितारों और नीली पृथ्वी का वर्णन किया वो किसी कविता से कम नहीं था. वैज्ञानिक आर्केमेडीज़ का जन्म कब और कहां हुआ था. जानना चाहते हैं ग्राम रेंगहिया बाज़ार, महराजगंज उत्तर प्रदेश से गोविन्द यादव. आर्केमेडीज़ प्राचीन यूनान के जाने माने गणितज्ञ और आविष्कारक थे और उनका जन्म ईसा से कोई 290 से लेकर 280 साल पहले सिसली के सैराक्रूज़ नगर में हुआ था. ग्राम झगरुआ, दरभंगा बिहार से मोहम्मद अफ़रोज़ आलम पूछते हैं कि मैडम टुसौड कौन हैं.
मैडम टुसौड एक मूर्तिकार थीं जिनका संग्रह लंदन की मैरिलेबोन रोड पर स्थित है जिसे मैडम टुसौड्स के नाम से जाना जाता है. उनका जन्म 1761 में फ़्रांस के स्ट्रासबर्ग शहर में हुआ और नाम रखा गया मैरी ग्रौशॉल्ट्ज़. उनकी मां फ़िलिप कर्टियस नाम के एक डॉक्टर के यहां काम करती थीं जिन्हे मोम की आदम क़द मूर्तियां बनाने का शौक़ था. मैरी ने उन्ही से ये कला सीखी. चौंतीस साल की उम्र में मैरी ने फ़्रान्सुआ टुसौड नामके इंजीनियर से शादी कर ली और वो मैडम टुसौड के नाम से जानी जाने लगीं. अगले तैंतीस साल तक वो अपनी मूर्तियों का संग्रह लेकर देश विदेश घूमती रहीं और आख़िरकार 1835 में लंदन में आ बसीं. यहां उन्होने एक स्थाई प्रदर्शनी लगाई. सन 1850 में मैडम टुसौड का देहान्त हो गया. फिर उनके पोते जोज़फ़ रैंडल उनकी प्रदर्शनी को मैरिलेबोन रोड पर ले आए. इसमें चार सौ से ज़्यादा आदम क़द मूर्तियां हैं और इतनी सजीव लगती हैं कि कभी कभी देखने वालों को भ्रम हो जाता है. एन सी सी की स्थापना कब और क्यों की गई थी. जानना चाहते हैं ग्राम डिपौटी पुरन्दाहा, पूर्णिया बिहार से गुंजन कुमार पप्पू. एनसीसी की स्थापना 1948 में भारतीय संसद में पारित एक अधिनियम के अधीन हुई. इसका आदर्श वाक्य है एकता और अनुशासन. इसका उद्देश्य था देश के युवा वर्ग का चरित्र निर्माण करना, उनमें साहस, भाईचारे, अनुशासन, नेतृत्व, खेल की भावना, निस्वार्थ सेवा और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का समावेश करना. सन 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान भारतीय सेना के बाद सुरक्षा की ज़िम्मेदारी ऐनसीसी के कैडेट्स पर थी. सभी छात्र और छात्राएं एनसीसी में शामिल हो सकते हैं. ये उन युवाओं को बहुत अच्छा प्रशिक्षण देती है जो सशस्त्र सेना में जाना चाहते हैं. |
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