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ईरान पर प्रतिबंध प्रस्ताव की तैयारी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईरान को मनाने की कोशिश कर रहे दुनिया के छह बड़े देशों ने निराशा व्यक्त कि है कि ईरान अपना यूरेनियम संबर्धन का काम रोकने को राज़ी नहीं है. ईरान पर प्रतिबंध लगाए जाने की संभावना पर लंदन में एक बैठक में विचार करने के बाद इन छह देशों ने यह यह बयान दिया है. इस बीच अमरीका के विदेश उपमंत्री निकोलस बर्न्स ने कहा है कि ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव पर अगले हफ़्ते से काम शुरु होगा. वैसे अमरीकी विदेश मंत्री रविवार को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर से मिलकर इस पर और चर्चा करने वाली हैं. ईरान अपने परमाणु संवर्धन कार्यक्रम को रोकने से लगातार इनकार करता रहा है. अमरीका और कुछ यूरोपीय देश मानते हैं कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है जबकि ईरान का कहना है कि उसका पूरा परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों के लिए हैं. रुस ख़िलाफ़ इस बैठक में अमरीका, ब्रिटेन, चीन, जर्मनी, फ़्रांस और रुस के विदेश मंत्री उपस्थित थे. हालांकि इन छह देशों के बीच इस बात को लेकर विरोधाभास बना हुआ है कि ईरान के मसले को किस तरह से देखा जाए. निकोलस बर्न्स ने साफ़ संकेत दे दिए हैं कि ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंध के लिए प्रस्ताव तो आना ही है. लेकिन उन्होंने कहा कि अभी यह तय नहीं हुआ है कि जिस प्रस्ताव को वोट के लिए रखा जाएगा उसमें किस तरह के प्रतिबंधों का ज़िक्र किया जाएगा. ख़ासकर रुस ईरान के ख़िलाफ़ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई के ख़िलाफ़ है. चीन और रूस कहते रहे हैं कि इस मसले के समाधान के लिए कूटनीति ही सबसे बेहतर तरीका है. इससे पहले गुरुवार को रूस के विदेशमंत्री सरगई लावरोव कह चुके हैं कि प्रतिबंधों को अत्यधिक चिंताजनक स्थिति पैदा होने पर ही लगाना चाहिए. उन्होंने कहा कि वो अन्य विकल्पों पर भी विचार करना चाहेंगे ताकि बहुदलीय कूटनीतिक प्रयासों को और आगे बढ़ाया जा सके. | इससे जुड़ी ख़बरें बहुमत ईरान पर सैन्य कार्रवाई के ख़िलाफ़21 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना अमरीका-ब्रिटेन पर ईरान का आरोप20 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना ईरान पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ हैं शिराक18 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना ईरान को गुटनिरपेक्ष देशों का समर्थन17 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना 'ईरान पर अमरीकी रिपोर्ट ग़लत'14 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना 'बातचीत में कुछ ग़लतफ़हमी दूर हुई'10 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना 'ईरान ने लेबनान पर वचनबद्धता दोहराई'03 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना 'ईरान ने समय सीमा नज़रअंदाज़ की'31 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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