|
ईरान परमाणु मसले पर बातचीत | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईरान के परमाणु मसले पर चर्चा करने के लिए शुक्रवार को छह देशों के विदेश मंत्री लंदन में एक बैठक करेंगे. बैठक में ईरान के परमाणु मसले के समाधान पर चर्चा होनी है. ईरान अपने परमाणु संवर्धन कार्यक्रम को रोकने से लगातार इनकार करता रहा है. इस बैठक में इस बात पर भी चर्चा होगी. इस बैठक में अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस और ब्रिटेन के विदेशमंत्री मारग्रेट बेकेट चीन, जर्मनी, फ़्रांस और रूस के विदेश मंत्रियों से माँग कर सकते हैं कि ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने चाहिए. हालांकि लंदन में बैठक कर रहे छह देशों के बीच इस बात को लेकर विरोधाभास बना हुआ है कि ईरान के मसले को किस तरह से देखा जाए. चीन और रूस कहते रहे हैं कि इस मसले के समाधान के लिए कूटनीति ही सबसे बेहतर तरीका है. इससे पहले गुरुवार को रूस के विदेशमंत्री सरगई लावरोव कह चुके हैं कि प्रतिबंधों को अत्यधिक चिंताजनक स्थिति पैदा होने पर ही लगाना चाहिए. उन्होंने कहा कि वो अन्य विकल्पों पर भी विचार करना चाहेंगे ताकि बहुदलीय कूटनीतिक प्रयासों को और आगे बढ़ाया जा सके. कोशिशें यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब यूरोपीय संघ ईरान को अपना परमाणु कार्यक्रम रोकने के लिए राज़ी कर पाने में विफल रहा है. बीबीसी के कूटनीतिक मामलों के संवाददाता के मुताबिक अमरीका और ब्रिटेन इस बात पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि अगले सप्ताह से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के ख़िलाफ़ क़दम उठाने के मुद्दे पर चर्चा शुरू की जा सके. संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन के राजनयिक ने भी कहा है कि ईरान पर प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र की अगले सप्ताह बैठक हो सकती है. ग़ौरतलब है कि ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण मकसद के लिए है जबकि अमरीका आरोप लगाता रहा है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करना चाहता है. ईरान को संयुक्त राष्ट्र की ओर से 31 अगस्त तक की समयसीमा दी गई थी जिसके अंदर उसे अपने परमाणु कार्यक्रम को रोकना था पर ईरान ने ऐसा नहीं किया. | इससे जुड़ी ख़बरें बहुमत ईरान पर सैन्य कार्रवाई के ख़िलाफ़21 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना अमरीका-ब्रिटेन पर ईरान का आरोप20 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना ईरान पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ हैं शिराक18 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना ईरान को गुटनिरपेक्ष देशों का समर्थन17 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना 'ईरान पर अमरीकी रिपोर्ट ग़लत'14 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना 'बातचीत में कुछ ग़लतफ़हमी दूर हुई'10 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना 'ईरान ने लेबनान पर वचनबद्धता दोहराई'03 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना 'ईरान ने समय सीमा नज़रअंदाज़ की'31 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||