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बुश हाउस क्या जॉर्ज बुश ने बनवाया? | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ग्राम अमृति जंगल, सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश के राजेश कुमार सिंह, पूछते हैं कि बीबीसी के ऑफ़िस को बुश हाउस क्यों कहा जाता है क्या उसे जॉर्ज डब्लू बुश ने बनवाया था. बुश हाउस जॉर्ज डब्लू बुश के पैदा होने से बहुत पहले बन चुका था. बुश हाउस का डिज़ाइन हार्वी कॉरबैट ने तैयार किया था और यह इमारत 1923 में बनी थी. इसका निर्माण एक आंग्ल-अमरीकी व्यापारिक संगठन के लिए किया गया था जिसके प्रमुख थे इरविंग टी बुश. उन्ही के नाम से इस इमारत का नाम रखा गया बुश हाउस. यह बड़ी भव्य इमारत है जिसके बराम्दे में स्थित दो स्तंभों के ऊपर एक वेदिका के दोनों ओर दो पुरुष प्रतिमाएं खड़ी हैं जो आंग्ल-अमरीकी मैत्री की प्रतीक हैं और वेदिका पर ये वाक्य उकेरा गया है, डैडिकेटिड टू द इंगलिश स्पीकिंग पीपल्स. यानि ये इमारत अंग्रेज़ी बोलने वाले लोगों को समर्पित है. बीबीसी की विदेशी भाषाओं के प्रसारण 1938 में एक अन्य इमारत से शुरु हुए थे लेकिन दूसरे विश्वयुद्ध में हुई बम्बारी में वह क्षतिग्रस्त हो गई तो ये प्रसारण बुश हाउस से होने लगे. बस तभी से बुश हाउस बीबीसी विश्वसेवा का घर बना हुआ है लेकिन इस इमारत का स्वामित्व बीबीसी के पास नहीं है. ग्राम चन्दन पट्टी, ज़िला दरभंगा बिहार से फ़ैज़ आलम फ़ैज़ी ये जानना चाहते हैं कि अंडरआर्म बोलिंग क्या होती है और रिवर्स स्विंग कैसे की जाती है. जब क्रिकेट की शुरुआत हुई तो गेंदबाज़ झुककर घुटने के पास से गेंद फेंकते थे जैसे लट्टू या कंचे फेंके जाते हैं. लेकिन अब इसतरह गेंद नहीं फेंकी जाती. सन 1787 में जब मैरिलिबोन क्रिकेट क्लब का गठन हुआ तो उसने क्रिकेट के नियम बनाए. उसके अनुसार गेंद, हाथ को सिर के ऊपर से घुमाकर फेंकी जाती है. जहां तक रिवर्स स्विंग का सवाल है आपने देखा होगा कि गेंदबाज़ अकसर गेंद को अपनी कमीज़ या पतलून पर चमकाते रहते हैं. लेकिन उसका भी एक तरीक़ा है. गेंद केवल एक तरफ़ से चमकाई जाती है और एक तरफ़ से वह खुरदुरी बनी रहती है. जब गेंदबाज़ गेंद फेंकता है तो गेंद के चमकाए हुए हिस्से को बल्लेबाज़ की तरफ़ रखता है और खुरदुरे हिस्से को फ़ील्डर की तरफ़. बल्लेबाज़ को ऐसा लगेगा कि गेंद आउट स्विंग हो रही है लेकिन जब वो नीचे आने लगती है तो इन स्विंग हो जाती है इसे रिवर्स स्विंग कहते हैं. ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर से नेहा सिंह ने बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम के ज़रिए पूछा है कि क्या नेता जी सुभाषचन्द्र बोस अब भी जीवित हैं.
नेता जी का जन्म 23 जनवरी 1897 में उड़ीसा के कटक शहर के एक समृद्ध बंगाली परिवार में हुआ था. अगर वो जीवित होते तो 108 वर्ष के होते. ये माना जाता है कि 18 अगस्त 1945 को जिस विमान से वो ताईवान से टोकियो जा रहे थे वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया और उनकी मृत्यु हो गई. लेकिन क्योंकि उनका शव नहीं मिला इसलिए कई तरह की अटकलें लगाई जाती रही हैं. समय समय पर ऐसी अफ़वाहें भी गर्म रहीं कि नेता जी को अमुक जगह देखा गया. बहरहाल उनके लापता होने की जांच करने के लिये भारत सरकार ने 14 अप्रैल 1999 को मुखर्जी आयोग का गठन किया. न्यायमूर्ति मुखर्जी को, अगस्त और सितम्बर 1945 में, ताईवान में किसी विमान दुर्घटना के रेकार्ड नहीं मिले. उन्हे अपनी रिपोर्ट 14 मई तक देनी थी लेकिन उनकी रूस यात्रा स्थिगित हो जाने से अब वो नवम्बर में अपनी रिपोर्ट देंगे. वो इस दावे की जांच करना चाहते हैं कि क्या नेता जी को सोवियत सरकार ने साईबेरिया में बंदी बनाकर रखा था और क्या वहीं उनकी मृत्यु हुई. जगरनाथपुर मधुबनी बिहार से लालबाबू सिंह ने बीबीसी हिन्दी डॉट कॉंम के ज़रिए पूछा है कि किसी भी वित्तीय वर्ष में सरकार किस आधार पर नोट छापती है. यह कई बातों पर निर्भर करता है. एक है सालाना विकास दर. बजट में यह तय किया जाता है कि विकास दर का क्या लक्ष्य रखा जाए. उसके हिसाब से ये देखा जाता है कि कितनी मुद्रा की ज़रूरत पड़ेगी. हर साल मौजूदा नोटों के ख़राब हो जाने पर भी नए नोट छापे जाते हैं. इसके अलावा कितनी तेज़ी से मुद्रा का प्रसार हो रहा है इसका ध्यान रखकर भी नोट छापे जाते हैं. रैटल स्नेक क्या होता है. कहां पाया जाता है और कितना ज़हरीला होता है. सोनबे पलामू झारखंड से रंजय कुमार राज.
इसे यह नाम इसलिए मिला है क्योंकि जब ये रेंगता है तो इसकी पूंछ खड़खड़ाती है. हालांकि ये ज़हरीला होता है लेकिन हमला तभी करता है जब उसे ख़तरा महसूस हो. ये आमतौर पर छिपे रहते हैं और मुश्किल से दिखाई देते हैं. एक वयस्क रैटल स्नेक का वज़न 2 पाउंड या एक किलो से कुछ कम होता है और इसकी लम्बाई 38 से 40 इंच और मोटाई 8 से 9 इंच होती है. इनकी औसत आयु 12 से 18 साल होती है लेकिन जंगल में ये 22 से 25 साल तक जी लेते हैं. ये उत्तरी अमरीका में पाये जाते हैं. ये रात के समय शिकार करते हैं. इनके ज़हर में पाचक ऐन्ज़ाइम भी होते हैं जो इनके शिकार को इनके निगलने से पहले ही विघटित करने लगते हैं. चंगेज़ ख़ान के पिता का क्या नाम था. ग्राम भटौनी, सहरसा बिहार से मोहम्मद मुशाहिद हसन. चंगेज़ ख़ान का जन्म 1160 के दशक में मंगोलिया के पर्वतीय इलाक़े बुरहान हल्दून में हुआ. उनके पिता कियाद क़बीले के नेता थे और उनका नाम था येसूख़ेई. उनकी मां ओल्कुनुत क़बीले की थीं और उनका नाम होइलुन था. चंगेज़ ख़ान के माता पिता ने उनका नाम रखा था तेमुजेन. जब तेमुजेन दस बारह साल के थे तो उनके पिता को ज़हर देकर मार दिया गया. कई साल तक वो अपनी मां के साथ यहां वहां भटकते रहे. बाद में जब उन्होने मंगोल क़बीलों को संगठित किया तब उन्हे चंगेज़ ख़ान के नाम से जाना जाने लगा जिसका मतलब होता है दुनिया का शासक, जिसे उन्होने चरितार्थ भी किया. उनका साम्राज्य कोरिया से लेकर किएफ़ तक और दक्षिण में सिंधु नदी तक फैला हुआ था. |
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