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शुक्रवार, 22 सितंबर, 2006 को 10:17 GMT तक के समाचार
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सैनिक नेतृत्व को शाही समर्थन की पुष्टि
थाईलैंड के सम्राट भूमिबोल अदुल्यदेज
थाईलैंड में राजा का काफ़ी आदर किया जाता है
थाईलैंड में सरकार का तख़्तापलट करने वाले सैन्य नेताओं को शुक्रवार को एक समारोह आयोजित करके औपचारिक रूप से शाही मंज़ूरी दी गई है.

इस समारोह का राष्ट्रीय टेलीविज़न चैनलों पर सीधा प्रसारण किय गया. इसके ज़रिए सैन्य नेताओं के दो दिन पहले दिए गए उस बयान की भी पुष्टि की गई कि तख़्तापलट को सम्राट का समर्थन हासिल है.

ग़ौरतलब है कि एक सैन्य गुट ने कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री टाकसिन चिनावाट की सरकार का उस समय तख़्तापलट दिया था जब वह न्यूयॉर्क में थे.

थाईलैंड की राजधानी बैंकाक में मौजूद बीबीसी संवाददाता जोनाथन हैड का कहना है कि तख़्तापलट की कामयाबी का सबसे महत्वपूर्ण कारण ये था कि उसे सम्राट का समर्थन हासिल था.

तख़्तापलट की अगुवाई करने वाले जनरलों ने पहले ही बुधवार को दावा किया था कि उन्हें शाही समर्थन हासिल है.

शुक्रवार को जब सेना मुख्यालय पर एक समारोह हुआ तो जनरलों ने अपने इस दावे को दोहराया और उसकी शाही पुष्टि भी कर दी गई. इसके लिए समारोह में शाही बयान पढ़कर सुनाया गया.

देश के नए नेता जनरल सोंथी बून्यारातग्लिन इस मौक़े पर औपचारिक सफ़ेद रंग की पोशाक में नज़र आए. उन्होंने राजा की तस्वीर के सामने झुककर प्रणाम किया. ग़ौरतलब है कि इस समारोह का टेलीविज़न चैनलों पर सीधा प्रसारण किया गया.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस तरह की छवि से नई सैनिक परिषद की वैधता को आम लोगों में साबित और स्थापित करने में मदद मिलेगी ख़ासतौर से देश के दूरदराज़ के हिस्सों में रहने वाले लोगों में.

कहा जाता है कि दूरदराज़ के हिस्सों में पूर्व प्रधानमंत्री टाकसिन चिनावाट अब भी लोकप्रिय समझे जाते हैं लेकिन वहाँ राजा का भी आदर किया जाता है.

यह समझा जाता है कि टाकसिन चिनावाट के नेतृत्व पर केंद्रित राजनीतिक संघर्ष की वजह से राजा को ख़ासी परेशानी हो रही थी और यही वजह है कि देश में बहुत से लोगों ने सैनिक हस्तक्षेप को समय की ज़रूरत के रूप में स्वीकार कर लिया.

यहाँ तक कि ख़ुद राजा भी तख़्तापलट के बाद सार्वजनिक रूप से प्रकट नहीं हुए हैं और अभी यह स्पष्ट नहीं है कि तख़्तापलट में क्या राजा की कोई भूमिका रही है और रही है तो किस तरह की.

नई सैनिक सत्ता व्यवस्था के विरोध के अभी थोड़े ही संकेत नज़र आए हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने राजनीतिक गतिविधियों और मीडिया पर लगाए प्रतिबंधों पर चिंता ज़रूर ज़ाहिर की है.

चिनावाटकार्यशैली से चर्चित
अपनी कार्यशैली के कारण चिनावाट की सराहना और आलोचना दोनों हुई है.
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