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आँख क्यों फड़कती है भला... | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
खेतको, ज़िला हजारीबाग झारखंड से रामचंद्र महतो जानना चाहते हैं कि आँख फड़कने का वैज्ञानिक कारण क्या है. पलक फड़कना एक आम लक्षण है. इसमें आँख के आसपास की मांसपेशियां अपने आप संकुचित होती हैं जिससे उलझन तो बहुत होती है लेकिन नुक़सान कोई नहीं होता और थोड़ी बहुत देर में ये अपने आप बंद भी हो जाता है. इसका क्या कारण है ये कहना मुश्किल है लेकिन आंखों के विशेषज्ञ ये मानते हैं कि इसका संबंध थकान से होता है. नींद की कमी, कैफ़ीन का ज़्यादा प्रयोग, कम रोशनी में काम करना या देर तक कम्प्यूटर पर काम करना इसके कुछ कारण हो सकते हैं. आँख फड़कने का मतलब ये है कि आपकी मांसपेशियां थक गई हैं उन्हें आराम देने की ज़रूरत है. इसके अलावा आँख के आसपास की मांसपेशियों की हल्की मालिश, गर्म या ठंडी पट्टी लगाना, आंखों को गुनगुने पानी से धोना आदि कुछ उपाय हैं जिन्हें आप कर सकते हैं. भारत में रंगोली का इतना महत्व क्यों है? ये कब शुरु हुई और इसे केवल महिलाएं ही क्यों बनाती हैं. रंगोली भारत की एक पुरानी सांस्कृतिक परम्परा है. इसे आमतौर पर घर की दहलीज़ पर सूखे और प्राकृतिक रंगों से बनाया जाता है. रंगोली, त्योहार, पूजा शादी ब्याह आदि शुभ अवसरों पर बनाई जाती है. इसमें साधारण ज्यामितिक डिज़ाइन हो सकते हैं या फिर देवी देवताओं की आकृतियां. इनका प्रयोजन अमंगलकारी शक्तियों को भीतर आने से रोकना होता है. इन्हें प्राय महिलाएं क्यों बनाती हैं इसका कारण संभवत हिन्दू मिथक में मिल सकता है. तमिलनाडू में यह मिथक प्रचलित है कि मारकाड़ी के महीने में देवी आंडाल ने भगवान तिरुमाल से विवाह की विनती की. लम्बी साधना के बाद वो भगवान तिरुमाल में विलीन हो गई. इसलिए इस महीने में अविवाहित लड़कियां सूर्योदय से पहले उठकर भगवान तिरुमाल के स्वागत के लिए रंगोली सजाती हैं. मैग्नाकार्टा क्या है? जानना चाहते हैं ग्राम मधुलता, अरड़िया बिहार के रौशन कुमार. इंगलैंड के राजा जॉन ने 12 जून 1215 को एक आदेश-पत्र जारी किया जिसमें राजा के अधिकारों पर सीमाएं निर्धारित की गईं थीं. राजा जॉन बड़े ही क्रूर और निरंकुश शासक थे इसलिए सामन्तों ने उनके ख़िलाफ़ विद्रोह किया और कहा कि अगर वो इस आदेश पत्र की शर्तें नहीं मानेंगे तो युद्ध छिड़ जाएगा. मजबूर होकर राजा ने इसे जारी किया. इसमें पहली बार ये बात मानी गई कि जनता, सरकार और राजा कोई क़ानून के दायरे से बाहर नहीं है. मैग्नाकार्टा को ब्रिटेन के संविधान की आधारशिला माना जाता है. जापान की कुल जनसंख्या कितनी है और क्या जापान भी भारत की तरह संयुक्त राष्ट्र में स्थाई सीट चाहता है. जानना चाहते हैं कटरा मुबारकपुर उत्तर प्रदेश से मसूद अहमद आज़मी.
सन 2003 के आंकड़ों के अनुसार जापान की कुल जनसंख्या 12 करोड़ 80 लाख थी. इनमें से 65 वर्ष आयु के लोगों की संख्या दो करोड़ 43 लाख थी जो कुल आबादी का 19 प्रतिशत बैठता है. जबकि 1975 से जन्म दर में कमी आई है. क्योंकि जापान छोटा सा देश है इसलिए यहां जनसंख्या घनत्व काफ़ी है. औसतन एक वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 341 लोग रहते हैं. जापान भारत की तरह संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में स्थाई सीट चाहता है. सारण बिहार से मिथिलेश कुमार पूछते हैं कि अर्द्धसैनिक बल से क्या तात्पर्य है. ये पुलिस या सेना से कैसे भिन्न है. उत्तर अर्द्ध सैनिक बल वो बल हैं जो पुलिस से ज़्यादा शक्तिशाली और सक्षम हैं उनके पास पुलिस से ज़्यादा हथियार होते हैं लेकिन सेना से कम. भारत में 6 अर्द्धसैनिक बल हैं जिनमें से तीन सीमाओं की सुरक्षा करते हैं. इसमें सबसे पहले सीमा सुरक्षा बल या बॉर्डर सिक्योरिटी फ़ोर्स है जो पाकिस्तान और बांगलादेश से लगी सीमाओं की सुरक्षा करता है. दूसरा भारत-तिब्बत पुलिस है जो तिब्बत से लगी सीमा की सुरक्षा करती है. तीसरा असम रायफ़ल्स है जो देश की पूर्वोत्तर सीमाओं की रक्षा करने के अलावा उन राज्यों में जारी विद्रोही गतिविधियों का सामना करता है. इनके अलावा तीन अर्द्धसैनिक बल और हैं - एक है केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ़) जो आंतरिक सुरक्षा के काम में आता है और जब राज्यों को अतिरिक्त सुरक्षा बल की आवश्यकता होती है तो वो केंद्र से इसकी तैनाती की दरख़्वास्त करते हैं और केन्द्र सीआरपीएफ़ को वहां भेज देता है. दूसरा बल है केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ़) जिसका गठन मुख्य रूप से औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए किया गया था लेकिन समय के साथ-साथ इसके स्वरूप में परिवर्तन होता गया है जैसे पिछले कुछ वर्षों में सीआईएसएफ़ को हवाई अड्डों की सुरक्षा का दायित्व दिया गया है और धीरे- धीरे इन्हें अतिविशिष्ठ व्यक्तियों यानी वीआईपी सुरक्षा का काम भी दिया जा रहा है. तीसरा सुरक्षा बल है नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) जो एक विशिष्ठ कमांडो फ़ोर्स है जिसका गठन अपचालन रोकने और आतंकवाद के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के लिए किया गया था लेकिन अब इसका प्रयोग अति विशिष्ट लोगों की सुरक्षा में किया जाने लगा है. दुनिया के किस हिस्से में ड्रूज़ सम्प्रदाय रहता है. क्या वो अलग धर्म में विश्वास करते हैं. उनकी संस्कृति और परम्पराओं के बारे में बताइए. गोलपहाड़ी जमशेदपुर से जंगबहादुर सिंह और उमा सिंह. ड्रूज़ मध्य पूर्व का एक अल्पसंख्यक सम्प्रदाय है जिसकी नींव ग्यारहवीं शताब्दी में पड़ी. अधिकांश ड्रूज़ लेबनान, सीरिया, इसराइल और जॉर्डन में रहते हैं. इतिहासकार मानते हैं कि ये एक सुधारवादी इस्लामिक आंदोलन था जो अल-हकीम के राज में शुरु हुआ. उन्हो्ने ग़ुलामी ख़त्म करने, बहु विवाह बंद कराने और धर्म को राज्य से अलग रखने जैसे मुख्य सुधार लागू किए. हकीम ने हमज़ा को धार्मिक नेता नियुक्त किया जिन्हो्ने धार्मिक सिद्धांत लिखे. ये हैं सच बोलना, अपने भाइयों की मदद करना, पुराने रीति-रिवाज़ों को छोड़ना, विधर्म से दूर रहना, एक ईश्वर में विश्वास करना, और ईश्वर की इच्छा के आगे आत्मसमर्पण करना. ड्रूज़ धर्म में किसी तरह का कर्मकांड नहीं है. न कोई उपासना पद्धति है, न कोई पवित्र दिन माने जाते हैं, न कोई तीर्थ है. इसमें धर्म परिवर्तन नहीं किया जाता. ड्रूज़ सम्प्रदाय दो वर्गों में बंटा हुआ है उक़्क़ाल यानी ज्ञानी और जुह्हल यानी अज्ञानी. |
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