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मंगलवार, 12 सितंबर, 2006 को 02:12 GMT तक के समाचार
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आतंकवादी हमलों का ख़तरा बरकरार-बुश
बुश
बुश ने 'आतंकवाद' के ख़िलाफ़ लड़ाई में सभी देशों को साथ मिल कर चलने की सलाह दी है
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ जारी जंग को 'सभ्यता के लिए संघर्ष' बताते हुए इराक़ पर हमले को जायज़ ठहराया है.

बुश ने 9/11 की पाँचवी बरसी पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए स्वीकार किया कि भविष्य में दुनिया के सामने मुश्किल चुनौतियाँ हैं जिनसे सभी देशों को मिल कर निपटना होगा.

उन्होंने इराक़ समेत कई अन्य देशों में अल क़ायदा की उपस्थिति और 'आतंकावदी' हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि अमरीका ओसामा बिन लादेन जैसे 'दुश्मनों' को ढूंढ कर उन्हें सजा दिलाएगा.

बुश ने चेतावनी देते हुए कहा कहा, "अमरीका को निशाना बनाने की कोशिश करने वालों का वही हश्र होगा जैसा हमनें पहले भी ऐसा करने वालों के ख़िलाफ़ किया है."

सभ्यता का संघर्ष

बुश ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ जारी लड़ाई पर कह, "कुछ लोग इसे सभ्यताओं के संघर्ष के रुप में देख रहे हैं, लेकिन हमारी लड़ाई सभ्यताओं को बचाने का संघर्ष है."

 अमरीका को निशाना बनाने की कोशिश करने वालों का वही हश्र होगा जैसा हमनें पहले भी ऐसा करने वालों के ख़िलाफ़ किया है
बुश

उन्होंने कहा, "यह 21 वदीं सदी का निर्णायक वैचारिक संघर्ष है. यह सभ्यताओं के लिए संघर्ष है. हम स्वतंत्र देशों की जीवनशैली को बरकरार रखने के लिए लड़ रहे हैं."

बुश ने कहा, "11 सितंबर की घटना के बाद अमरीका पर कोई और हमला नहीं हुआ है लेकिन ख़तरे कम नहीं हुए हैं. आतंकवादियों ने दर्जनों अन्य देशों को निशाना बनाया है."

आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में तीन हज़ार से भी अधिक अमरीकी जवानों के मारे जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब लक्ष्यों को बदल कर अमरीका उनकी कुर्बानी बेकार नहीं जाने देगा.

राष्ट्रपति ने कहा," लड़ाई अभी ख़त्म नहीं हुई है और यह तब तक ख़त्म नहीं होगी जब तक या हम या चरमपंथी विजयी नहीं हो जाते."

इराक़ युद्ध जायज़

अमरीकी राष्ट्रपति ने इराक़ पर हमले को उचित ठहराते हुए कहा, "कुछ लोग इराक़ पर हमले को सही नहीं मानते. लेकिन मैं आज भी मानता हूँ कि 9/11 के बाद सद्दाम हुसैन से पूरी दुनिया के लिए ख़तरा था और हम कोई ख़तरा मोल लेना नहीं चाहते थे."

वो कहते हैं, "निश्चित रुप से सद्दाम शासन के ख़ात्मे के बाद दुनिया ज़्यादा सुरक्षित हुई है."

उन्होंने कहा कि पिछले दिसंबर में चुनाव के बाद इराक़ की राष्ट्रीय एकता सरकार अमरीकी मदद से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है.

 आंतकवाद के ख़िलाफ़ सबसे सशक्त हथियार आज़ादी की ताकत है. वे (आतंकवादी संगठन) भी यह जानते हैं कि अग़र लोगों को विकल्प दिया जाए तो वे आज़ादी को अपनाएँगे

राष्ट्रपति बुश ने साफ़ किया कि अभी इराक़ से अमरीकी सेनाओं को हटाने का उनका कोई इरादा नहीं है.

उन्होंन कहा, "अल क़ायदा इराक़ में सक्रिय है. उसकी कोशिश जातीय हिंसा फैलाने की है. लादेन का कहना है कि इराक़ में उनकी जीत अमरीका की हार होगी. हम ऐसा होने नहीं देंगे."

बुश ने इसके पक्ष में तर्क देते हुए कहा, "अल क़ायदा इराक़ के संसाधनों का इस्तेमाल अपने नापाक इरादों के लिए कर सकता है. इसे रोकना होगा. इसके लिए अमरीकी सेना इराक़ी सुरक्षा बलों को प्रशिक्षण देकर तैयार कर रही है."

मध्य पूर्व

बुश ने कहा कि चरमपंथी विचारधारा को शिकस्त देने के लिए 'आज़ादी की ताकत' का इस्तेमाल करना होगा.

उन्होंने कहा, "इसीलिए अमरीका अपनी नीति में बदलाव करते हुए दुनिया में लोकतंत्र और आज़ादी की भावना फैलाने के रास्ते पर आगे चल रहा है."

अमरीकी राष्ट्रपति ने मध्य पूर्व के देशों से भी इसी रास्ते पर चलने की अपील की. उन्होंने कहा, "चरमपंथ ख़त्म करने से ही नई पीढ़ी के उज्जवल भविष्य का निर्माण होगा."

बुश कहते हैं, "आंतकवाद के ख़िलाफ़ सबसे सशक्त हथियार आज़ादी की ताकत है. वे (आतंकवादी संगठन) भी यह जानते हैं कि अग़र लोगों को विकल्प दिया जाए तो वे आज़ादी को अपनाएँगे."

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