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लोगों में असुरक्षा की भावना बरकरार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका में पाँच साल पहले ग्यारह सितंबर 2001 को हुए हमलों के बाद दुनिया ही बदल गई. अफ़गानिस्तान औऱ इराक पर अमरीकी हमले हुए. तालेबान औऱ अल कायदा सदस्यों के ख़िलाफ़ कार्रवाई हुई. यह सिलसिला अभी जारी है. देश के अंदर अमरीकी प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ाने के मक़सद से कई क़दम उठाए. सुरक्षा से जुड़े कई कानूनों को और कड़ा बनाया गया. लेकिन इन सबके बावजूद सुरक्षा की बेहतरी के लिए कोई ख़ास नतीजा निकलता नज़र नहीं आ रहा है. अब भी अमरीका में आम लोगों में सुरक्षा को लेकर परेशानी देखी जा सकती है. सोनिया गवास भारत के पुणे शहर से 2001 में अपने पति के पास न्यू जर्सी आई थीं. उनके पति गनेश लदकत वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के टॉवर वन की 103 मंज़िल पर काम करते थे. वे उन हमलों में मारे गए थे. पांच साल बाद भी सोनिया को वह कल की ही बात लगती है. डर वे कहती हैं, "पाँच साल तो हो गए लेकिन लगता तो नहीं है कि इतना समय गुज़र गया. हर साल जब 11 सितंबर का दिन जैसे-जैसे पास आता है तो उस त्रासदी का असर और ज़्यादा महसूस होने लगता है. सारे दृश्य फिर से आंखों के सामने घूम जाते हैं. लगता है जैसे कल की ही बात हो." सोनिया गवास कहती हैं कि अब भी डर तो बना रहता है कि कभी भी कुछ भी हो सकता है. हमलो के पाँच साल बाद भी सुरक्षा की दृष्टि से कुछ ज़्यादा बदला नहीं है. अब भी बहुत से अपने को सुरक्षित महसूस नहीं करते. अमरीकियों की आम ज़िंदगी में भी काफ़ी बदलाव आए हैं. लोग हवाई जहाज़ों में सफ़र करने से कतराते हैं. विमान में सफ़र करने के लिए घंटों सुरक्षा जाँच से गुज़रना पड़ता हैं. हवाई अडडों पर सुरक्षा अधिकारी कई लोगों को शक हो जाने पर घंटों तलाशी और पूछताछ के लिए रोकते हैं. किसी भी सरकारी या ग़ैर सरकारी गगनचुंबी इमारत में दाख़िल होने से पहले आम लोगों की व्यापक तलाशी ली जाती है. 11 सितंबर से पहले ऐसा नहीं था. लोग आसानी से हवाई जहाज़ों में सफ़र के लिए जाते, अपने दफ़्तरों में बिना किसी तलाशी के दाखिल होते. हमलों के पाँच साल बाद भी सुरक्षा की दृष्टि से ज़्यादा कुछ नहीं बदला है. एक भारतीय संस्था एसोसिएसन ऑफ़ इंडियंस इन अमेरिका से जुड़े बुद्धदेव मानवर पेशे से एक डॉक्टर हैं औऱ न्यूयॉर्क में उनकी क्लीनिक वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से क़रीब है. जब लोग हमलों के बाद भाग रहे थे तो उन्होंने बहुत से ज़ख्मी लोगों का अपनी क्लीनिक में उपचार किया था. असुरक्षा डॉक्टर बुद्धदेव मानवर कहते हैं कि अब भी वे अपने आप को सुरक्षित महसूस नहीं करते. वह कहते हैं, “सुरक्षा अभी भी सही नहीं है, हमें अब भी हमलों का डर बना हुआ है. ख़ासकर जब हम लोग विमान में सफ़र करते हैं तब तो बहुत असुरक्षित महसूस करते हैं. जब तक सफ़र पूरा नहीं हो जाता डर लगा रहता है कि सही सलामत रहेंगे कि नहीं.”
वे कहते हैं कि लंदन और मुंबई में होने वाले बम धमाके जैसे हादसे न्यूयॉर्क में होने वाले हमलों की याद ताज़ा कर देते हैं. बहुत से लोगों में आम तौर पर इस बात पर भी रोष है कि बुश प्रशासन ने 11 सितंबर के हमलों के ज़िम्मेदार अल क़ायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन को अभी तक नहीं पकड़ा है. बल्कि राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश की आतंकवाद के ख़िलाफ़ जंग का भी अमरीकीयों की सुरक्षा बढ़ाने में कोई ख़ास असर नहीं दिख रहा है. न्यूयॉर्क की स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर श्रीधर ने भी 11 सितंबर के हमलों में अपने कुछ दोस्त खोए थे. वे कहते हैं कि बुश प्रशासन ने हमलों के बाद ग़लत नीतियाँ अपनाई हैं और जो हमलों के ज़िम्मेदार लोग हैं उन्हे पाँच साल बाद भी वह पकड़ने में नाकाम रहा है. वे कहते हैं, "वहाँ इराक़ में क्या हो रहा है, अफ़ग़ानिस्तान में क्या हो रहा है. और सुरक्षा की दृष्टि से अमरीका के अंदर अब भी लोग असुरक्षित महसूस करते हैं. इस प्रशासन ने दूसरे मुल्कों में जो कुछ किया है उससे अमरीकी लोगों की सुरक्षा घटी ही है बढ़ी नहीं है." प्रोफ़ेसर श्रीधर कहते हैं कि ओसामा बिन लादेन को पकड़ने के बजाए बुश का इराक़ पर हमला करना बिल्कुल ग़लत था. वे इस बात से भी अचंभित है कि अमरीका जैसा ताकतवर देश भी 11 सितंबर जैसे हमलों के ज़िम्मेदार लोगों को पकड़ने में नाकाम रहा है. | इससे जुड़ी ख़बरें भारत: पश्चिमी देशों की विचारधारा बदली09 सितंबर, 2006 | पहला पन्ना आतंकवाद पर यूरोपीय देशों की बैठक16 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना ब्रिटेन में समन्वय आयोग बनाया24 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना आतंकवाद के ख़िलाफ जी आठ एकजुट18 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना न्यूयॉर्क में 'आतंकवादी' साज़िश नाकाम07 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना लंदन:छापों के लिए पुलिस ने माफ़ी माँगी13 जून, 2006 | पहला पन्ना हमलों की साज़िश में 17 गिरफ़्तार03 जून, 2006 | पहला पन्ना बुश ने शीतयुद्ध का संकल्प याद किया27 मई, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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