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मंगलवार, 11 जुलाई, 2006 को 23:27 GMT तक के समाचार
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ग्वांतानामो क़ैदियों पर लागू होगी संधि
क़ैदी
ग्वांतानामो बे के क़ैदियों के साथ दुर्व्यवहार की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं
अमरीकी सरकार ने कहा है कि ग्वांतानामो बे में रखे गए क़ैदियों समेत उन सभी क़ैदियों के साथ जेनेवा संधि के तहत तय मानदंडों के अनुसार व्यवहार किया जाएगा जिन्हें अमरीकी सेना ने गिरफ्तार किया है.

सुप्रीम कोर्ट के एक फ़ैसले के दो हफ्ते बाद व्हाइट हाउस ने इस बदलाव की घोषणा की है.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा था कि ग्वांतानामो बे समेत सेना द्वारा गिरफ्तार सभी क़ैदी जेनेवा संधि के घेरे में आते हैं.

राष्ट्रपति बुश लगातार ये कहते रहे हैं कि अमरीका द्वारा हिरासत में लिए गए लोग जेनेवा संधि के घेरे में नहीं आते हैं.

पेंटागन ने सात जुलाई को सेना को जारी एक निर्देश में कहा है कि अब ग्वांतानामो बे के कैदियों के साथ जेनेवा संधि के तहत तय किए गए मानदंडों के अनुसार व्यवहार किया जाए.

निर्देश में कहा गया है कि सेना द्वारा हिरासत में लिए गए सभी लोग जेनेवा संधि की धारा 3 के तहत मानवीय व्यवहार और कुछ क़ानूनी मानदंडों के हकदार हैं.

क्यूबा के ग्वांतानामो बे में रखे गए क़ैदियों के साथ किए जा रहे दुर्व्यवहार को लेकर अमरीकी सरकार की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना होती रही है.

अमरीकी सरकार ने ग्वांतानामो बे में सैकड़ों लोगों को बंद कर रखा है और इनमें से अधिकतर 2001 में अफ़गानिस्तान पर अमरीकी हमलों के दौरान पकड़े गए थे.

यह कारागृह 2002 में बनाया गया था और उस समय राष्ट्रपति बुश ने कहा था कि इन क़ैदियों के साथ मानवीय व्यवहार किया जाए.

राष्ट्रपति बुश के प्रवक्ता टोनी स्नो ने मंगलार को कहा कि पेंटागन के निर्देश नीति में बदलाव नहीं हैं. उन्होंने कहा " यह नीति में बदलाव नहीं है. हमेशा से मानवीय व्यवहार हमारा मानदंड रहा है."

अदालत का हस्तक्षेप

जून महीने के अंत में सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ ने तीन के मुकाबले पांच मतों से यह फ़ैसला दिया कि बुश प्रशासन को यह आदेश देने का अधिकार नहीं है कि हिरासत में रखे गए क़ैदियों के ख़िलाफ सैनिक आयोग में मामला चलाया जाए.

अदालत ने कहा कि उनका यह फ़ैसला अमरीकी सैन्य क़ानूनों और जेनेवा संधि के आधार पर लिया गया है जिसके साथ ही अमरीकी सैन्य क़ानून में पहली बार यह बात भी जुड़ गई कि हिरासत में रखे गए लोग जेनेवा संधि के तहत आते हैं.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह संभावना छोड़ दी है कि कैदियों के खिलाफ सैनिक आयोग में मामला चलाया जा सके.

सीनेट की न्यायिक मामलों की समिति इस मामले पर सुनवाई शुरु करने वाली है.

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