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दुनिया कितनी छोटी हो गई है... | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सात जुलाई 2005 को मैं रात्रि शिफ़्ट से घर लौटकर गहरी नींद में सो रही थी. सुबह-सुबह मोबाइल फ़ोन बजा. फो़न भारत से था सो जैसे-तैसे उठाया. दूसरे छोर पर मेरी बहन थी. आवाज़ बिल्कुल घबराई हुई. बार-बार यही पूछ रही थी क्या मैं सुरक्षित हूँ? मैने मुश्किल से दो घंटे की नींद पूरी की थी... सो उस समय बेतुका सा लगने वाला ये सवाल सुनकर कुछ झल्ला गई. मैने थोड़ा चिढ़ कर पूछा क्या हो गया, कहीं बम फट गया है क्या? जबाव आया हाँ, चार धमाके हुए हैं, लंदन में....... बस उसके बाद तो नींद रफ़ू चक्कर हो गई और तुरंत जानने की कोशिश की कि आख़िर हुआ क्या है. दुनिया भी कितनी छोटी हो गई है. किसी भी हिस्से में कुछ भी हो, पूरी दुनिया को मिनटों में पता लग जाता है. | इससे जुड़ी ख़बरें सात जुलाई से सबक लें-मुस्लिम सांसद05 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना 'हमलों के मुद्दे पर बंटे हैं ब्रितानी मुस्लिम'04 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना क्या है सच्चाई पाकिस्तानी मदरसों की?05 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना मुस्लिम समुदाय में असुरक्षा की भावना08 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना ब्रितानी मुसलमानों में चिंता की लहर13 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना लंदनः कब क्या हुआ22 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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