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जापानी सैनिक इराक़ से वापस जाएँगे | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जापान के प्रधानमंत्री जुनिचिरो कोइज़ुमी ने घोषणा की है कि इराक़ में तैनात जापानी थल-सैनिकों को वापस बुलाने का फ़ैसला किया गया है. कुछ समय से ऐसी घोषणा होने का इंतज़ार था. जापान के 600 सैनिक दक्षिणी इराक़ में दिसंबर 2003 से पुनर्निर्माण की कई परियोजनाओं में जुटे हुए हैं. कोइज़ुमी का कहना था कि जापानी सैनिकों की इराक़ में मौजूदगी की इराक़ी सरकार और जनता ने सराहना की है. लेकिन ये सैनिक किसी लड़ाई में भाग नहीं ले सकते क्योंकि जापान का संविधान इसकी इजाज़त नहीं देता. महत्वपूर्ण है कि इससे पहले राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने इस तैनाती के लिए जापान की प्रशंसा की थी. जापान ने पेशकश की है कि उसके सैनिकों के इराक़ से वापस जाने के बाद भी वह इराक़ को सामान इत्यादि उपलब्ध करवाता रहेगा. लेकिन जापानी सैनिकों को इराक़ भेजने के फ़ैसले से जापानी जनता नाराज़ थी और अनेक लोगों का कहना था कि ये जापान के संविधान का उल्लंघन है. दूसरे विश्व युद्ध के बाद से ये पहली बार हुआ था कि जापान ने अपने सैनिक किसी युद्ध क्षेत्र में भेजे थे. | इससे जुड़ी ख़बरें आपस में नहीं, विदेशियों से लड़ें:सद्दाम15 मार्च, 2006 | पहला पन्ना बग़दाद में 15 और शव मिले14 मार्च, 2006 | पहला पन्ना इराक़ में विभिन्न घटनाओं में 66 की मौत12 मार्च, 2006 | पहला पन्ना इराक़ में 13 लोगों को फाँसी दी गई09 मार्च, 2006 | पहला पन्ना 'जातीय हिंसा गृह युद्ध में बदल सकती है'07 मार्च, 2006 | पहला पन्ना इराक़ युद्ध पर ब्लेयर की आलोचना04 मार्च, 2006 | पहला पन्ना इराक़ में ताज़ा हिंसा में 19 मारे गए03 मार्च, 2006 | पहला पन्ना इराक़ में वाहनों पर दिन का कर्फ़्यू03 मार्च, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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