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बुधवार, 15 मार्च, 2006 को 13:47 GMT तक के समाचार
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आपस में नहीं, विदेशियों से लड़ें:सद्दाम
सद्दाम हुसैन
सद्दाम हुसैन ने अदालत को 'मज़ाक' बताया
इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन ने बुधवार को अदालत में पेश होते हुए देशवासियों का आहवान किया है वे आपस में लड़ना बंद करें और सद्दाम हुसैन के शब्दों में, "एकजुट होकर आक्रमणकारियों का मुक़ाबला करें."

ग़ौरतलब है कि सद्दाम हुसैन और सात अन्य अभियुक्तों पर 1982 में दुजैल नाम के गाँव में 148 लोगों की हत्या करने का आदेश देने के आरोप में मुक़दमा चल रहा है लेकिन ये सारे अभियुक्त इन आरोपों से इनकार करते हैं.

अदालत में पेश होकर सद्दाम हुसैन का यह बयान चौंकाने वाला था. जज ने कहा कि सद्दाम हुसैन को आदेश दिया कि वह अदालत में राजनीतिक भाषण ना दें.

सद्दाम हुसैन ने इराक़ियों का आहवान किया कि वे आपस में ना लड़ें दें नहीं तो वे ख़ुद को ऐसे अंधेरे में पाएंगे जहाँ ख़ून की नदियाँ नज़र आएंगी.

अदालत की सुनवाई की जो ऑडियो सुविधा पत्रकारों को दी जा रही थी उसे सद्दाम हुसैन के इस बयान के बाद काट दिया गया और जज ने सुनवाई बंद कमरे में जारी रखने का आदेश दिया.

काले रंग के कोट सूट में और बिना टाई पहने अदालत में पेश हुए सद्दाम हुसैन ने कहा कि उन्हें हाल ही में यह सुनकर बहुत तकलीफ़ हुई है कि "हमारे लोगों को नुक़सान पहुँचाने के लिए यह सब कुछ हो रहा है."

मैं अध्यक्ष हूँ...
 मैं इस देश का अध्यक्ष हूँ.
सद्दाम हुसैन

"मेरी अंतरात्मा कहती है कि इन घटनाओं से इराक़ के महान लोगों का कुछ लेना-देना नहीं है."

सद्दाम हुसैन का इशारा समारा में शिया मज़ार परिसर में कुछ दिन पहले हुए बम धमाकों की तरफ़ था. उन धमाकों के बाद शिया-सुन्नी दंगे भड़क उठे थे.

जब जज रऊफ़ अब्दुल रहमान ने कहा कि सद्दाम हुसैन अदालत को राजनीतिक मंच के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं तो सद्दाम ने कहा, "मैं इस देश का अध्यक्ष हूँ."

अब आप अभियुक्त हैं
 किसी ज़माने में आप देश के अध्यक्ष हुआ करते थे, अब आप एक अभियुक्त हैं.
जज रऊफ़ अब्दुल रहमान

इस पर जज ने कहा, "किसी ज़माने में आप देश के अध्यक्ष हुआ करते थे, अब आप एक अभियुक्त हैं."

इस पर भी सद्दाम हुसैन रुके नहीं. जातीय हिंसा के ख़िलाफ़ इराक़ियों को आगाह करने के अंदाज़ में वह कहते गए, "बिना किसी वजह आप लोग अंधेरे में पहुँच जाएंगे जहाँ ख़ून की नदियाँ बहेंगी."

उन्होंने विद्रोही गतिविधियों को "अमरीकी आक्रमण के ख़िलाफ़ मुक़ाबले" का नाम देते हुए सराहना की.

तिकरिती का इनकार

सद्दाम हुसैन के सौतेले भाई और इराक़ की ख़ुफ़िया सेवाओं के पूर्व प्रमुख बरज़ान इब्राहीम अल तिकरिती ने इसी सुनवाई के दौरान दुजैल गाँव में 148 शियाओं की मौत के मामले में अपना हाथ होने से इनकार किया.

सद्दाम, तिकरिती और अन्य अभियुक्त

तिकरिती ने बुधवार को अदालत में पेश होकर कहा कि उन्होंने बेवजह गिरफ़्तारियाँ करने के लिए सुरक्षा बलों के लोगों को फटकारा था और बहुत से बंदियों को रिहा करने के आदेश दिए थे.

तिकरिती ने कहा, "मैंने उन बंदियों से हाथ मिलाया और उन्हें जाने दिया था."

उन्होंने कहा कि सद्दाम हुसैन पर क़ातिलाना हमला होने के तुरंत बाद उन्होंने दुजैल गाँव का दौरा किया था और उसके बाद वह वहाँ कभी नहीं गए.

तिकरिती ने कहा कि सद्दाम हुसैन पर हुए हमले का मामला एक सरकारी एजेंसी देख रही थी और वह उनके अपने नियंत्रण में नहीं थी.

इससे पहले हुई गवाहियों में गवाहों ने कहा है कि सद्दाम हुसैन पर हुए हमले के बाद सुरक्षा अभियान में तिकरिती ने निजी रूप से उन्हें प्रताड़ित किया था.

तिकरिती को 1982 का एक दस्तावेज़ दिखाया गया जिस पर संभवतः तिकरिती के दस्तख़त हैं. इसमें दुजैल गाँव में सुरक्षा अभियान चलाने वाले ख़ुफ़िया अधिकारियों को सम्मानित किए जाने की बात कही गई है.

तिकरिती ने उस दस्तावेज़ पर अपने दस्तख़त होने से इनकार करते हुए कहा है कि जालसाज़ी करके उनके दस्तख़त बनाए गए हैं.

तिकरिती ने दलील दी कि दुजैल गाँव के लोगों को मारना सही था क्योंकि उन्होंने सद्दाम हुसैन पर ऐसे समय में क़ातिलाना हमला किया था जब इराक़ का ईरान के साथ युद्ध चल रहा था.

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