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भारत यात्रा को लेकर आशावादी हैं बुश | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने आशा प्रकट की है कि भारत यात्रा के दौरान असैनिक परमाणु सहयोग के मामले में सहमति बन सकेगी. भारत यात्रा पर जाने से पहले भारतीय समाचारपत्र 'दैनिक भास्कर' से बातचीत में अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा कि वे अपने इस दौरे को लेकर बहुत उत्साहित हैं. बुश ने स्वीकार किया कि असैनिक परमाणु सहयोग में अभी कई मसले ऐसे हैं जिनका हल निकालना होगा लेकिन उन्होंने आशा प्रकट की कि भारत और अमरीका सहयोग के नए रास्ते पर क़दम आगे बढ़ाएँगे. अमरीका के विदेश उप मंत्री निकोलस बर्न्स इस समय भारत में हैं जहाँ वे असैनिक परमाणु सहयोग के मुद्दे पर भारत के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत कर रहे हैं. उनकी भारत यात्रा का उद्देश्य ही राष्ट्रपति बुश की यात्रा से विवादास्पद मुद्दों पर सहमति बनाना है. अमरीकी राष्ट्रपति ने बुधवार एशिया सोसाइटी की बैठक में कहा था कि "भारत को अपने सैनिक और असैनिक परमाणु कार्यक्रमों को अलग-अलग करने के लिए एक पारदर्शी और सुरक्षित योजना तैयार करनी चाहिए." अमरीकी राष्ट्रपति ने गुरूवार को दिए गए इंटरव्यू में कहा है, "मैं उम्मीद करता हूँ कि भारत पहुँचने के बाद हम सैनिक और असैनिक परमाणु कार्यक्रमों को अलग करने पर सहमति बना सकेंगे, उसके बाद जो समझौता होगा उसे हम अमरीकी संसद के सामने पेश करेंगे." 'ज़िम्मेदार शक्ति' भारत और अमरीका के बीच परमाणु सहयोग संधि को लागू करने के लिए ज़रूरी है कि अमरीकी संसद इसकी मंज़ूरी दे लेकिन अमरीकी संसद में कई सांसद ऐसे हैं जिनका कहना है कि यह परमाणु अप्रसार के सिद्धांतों के अनुकूल नहीं है.
इस प्रस्तावित संधि का विरोध करने वालों का कहना है कि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि यानी एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं इसलिए उससे सहयोग नहीं किया जाना चाहिए. भारत का कहना रहा है कि पिछले पाँच दशकों में भारत ने कभी परमाणु तकनीक या सामग्री का प्रसार नहीं किया है. अमरीकी राष्ट्रपति ने भी कहा है कि वे भारत को एक 'ज़िम्मेदार शक्ति' मानते हैं और उसके साथ सहयोग करने के इच्छुक हैं. अमरीकी राष्ट्रपति ने अफ़सोस ज़ाहिर किया वे भारत यात्रा के दौरान अपने व्यस्त कार्यक्रम की वजह से ताजमहल नहीं देख पाएँगे. उन्होंने उम्मीद ज़ाहिर की कि उन्हें दोबारा भारत जाने का मौक़ा मिलेगा तब वे आगरा भी जाएँगे. जब राष्ट्रपति बुश से पूछा गया कि वे क्रिकेट मैच और बॉलीवुड फ़िल्म में से क्या देखना पसंद करेंगे तो उन्होंने कहा, "मैं क्रिकेट पसंद करूँगा, मुझे क्रिकेट के बारे में समझने का मौक़ा बहुत कम मिला है लेकिन यह समय बिताने का अच्छा तरीक़ा है." | इससे जुड़ी ख़बरें 14 को न्यूयॉर्क में मिलेंगे मनमोहन-मुशर्रफ़10 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस आपसी सहयोग के कई समझौते08 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस भारत-यूरोपीय संघ सहयोग पर राज़ी07 सितंबर, 2005 | पहला पन्ना लोकतांत्रिक संस्थाओं को समर्थन29 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ान संसद भवन निर्माण में भारत26 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस परमाणु क्षेत्र में पूरे सहयोग का भरोसा18 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना परमाणु ऊर्जा पर भारत उत्साहित19 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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