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ईरान समझौते के लिए तैयार: लारीजानी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईरान के प्रमुख परमाणु वार्ताकार अली लारीजानी ने कहा है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर समझौता करने के लिए तैयार है. उन्होंने बीबीसी को बताया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दुनिया के अन्य देशों की चिंता पर ईरान बातचीत करने के लिए राज़ी है. बातचीत के ईरान के ताज़ा प्रस्ताव को ब्रिटेन के बेमतलब कहने पर अली लारीजानी ने हैरत जताई. वाशिंगटन में अमरीका की विदेश मंत्री कॉंडोलीज़ा राइस और यूरोपीय संघ के विदेश नीति के प्रमुख हाविए सोलाना ने भी ईरान के प्रस्ताव को ज़्यादा अहमियत नहीं दी है. दोनों का कहना था कि बातचीत करने का कोई मतलब नहीं है जब तक ईरान नए प्रस्ताव लेकर नहीं आता. आईएईए इस बीच अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करने के लिए दो फ़रवरी को आपात बैठक बुलाई है. ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी ने ईरान का मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को भेजे जाने के लिए एक मसौदा तैयार किया है. अगर ईरान का मामला सुरक्षा परिषद जाता है तो कुछ परमाणु गतिविधियों के बारे में जानकारी न देने के लिए ईरान पर प्रतिबंध लग सकते हैं. ईरान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद भेजे जाने पर ईरान के विदेश मंत्री ने कहा है कि इसकी आशंका बहुत ‘कम’ है. ईरानी विदेश मंत्री ने अपने इस मत के लिए कोई ख़ास वजह नहीं दी पर कहा कि परमाणु शोध शुरू करने और परमाणु ईंधन बनाने में अंतर है. उधर रुस में ईरान के राजदूत ने बीबीसी से बातचीत में कहा है कि ईरान को अभी भी उम्मीद है कि ये मामला बातचीत और संयुक्त राष्ट्र के साथ सहयोग से सुलझ सकता है. ईरान ने हाल ही में अपना परमाणु शोध कार्यक्रम फिर से शुरू किया है. ईरान सरकार ने तमाम चेतावनियों की परवाह किए बिना अपने एक संवेदनशील परमाणु केंद्र पर लगी संयुक्त राष्ट्र की सील तोड़ दी थी. ईरान में पिछले दो साल से परमाणु शोध का काम नहीं हो रहा था. इस क़दम के बाद से ईरान का मामाला सुरक्षा परिषद भेजे जाने को लेकर चर्चा और तेज़ हो गई है. | इससे जुड़ी ख़बरें इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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