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रूस और चीन ने कहा धैर्य ज़रूरी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रूस ने कहा है कि ईरान पर प्रतिबंध लगाया जाना ईरानी परमाणु संकट से निबटने का एकमात्र या बेहतरीन तरीका नहीं है. चीन ने भी इस मामले में धैर्य से काम लेने की ज़रूरत बताई है. रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लवरोफ़ ने कहा, "ईरान पर प्रतिबंध थोपने का सवाल घोड़े के आगे गाड़ी लगाने के समान है. किसी भी तरह से प्रतिबंधों को संकट समाधान का एकमात्र या बेहतरीन उपाय नहीं कहा जा सकता." लवरोफ़ ने कहा कि समझौते का एक प्रस्ताव अब भी ईरान के सामने है जिसके तहत वह संवर्द्धन के लिए यूरेनियम रूस भेज सकता है. इससे पहले रूस ने संकेत दिया था कि ईरान मामले में उसका धैर्य समाप्त होता जा रहा है, हालाँकि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने समझौते की संभावना बने होने की बात की. उधर चीनी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने संयम से काम लेने की अपील करते हुए कहा है कि संबद्ध पक्षों को ईरान और यूरोपीय संघ के तीन देशों के बीच बातचीत की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने का प्रयास करना चाहिए. आपात बैठक बुलाने की माँग इससे पहले सोमवार को लंदन में हुई एक बैठक में सुरक्षा परिषद के पाँच स्थाई देशों और जर्मनी के प्रतिनिधियों ने ईरान से अपने परमाणु संवर्द्धन कार्यक्रम को तत्काल बंद करने की माँग की थी. परमाणु मुद्दे पर ईरान के साथ वार्ता करने वाले यूरोपीय संघ के तीन सदस्य देशों ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने इस बारे में 2 फ़रवरी को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा आयोग की आपात बैठक बुलाए जाने की भी माँग की है. आयोग को मामले को सुरक्षा परिषद में भेजने का अधिकार है जो कि ईरान पर प्रतिबंध लगाने का फ़ैसला कर सकती है. | इससे जुड़ी ख़बरें इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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