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'परमाणु कार्यक्रम से पीछे नहीं हटेंगे' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने कहा है कि अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा शुरु करने के फ़ैसले के बारे में ईरान ज़रा भी पीछे नहीं हटेगा. उनका कहना था कि ईरान को परमाणु तकनीक हासिल करने का पूरा हक़ है. राष्ट्रपति अहमदीनेजाद का बयान तब आया है जब ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी और अमरीका कह चुके हैं कि समय आ गया है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को इस मामले में शामिल किया जाए. लेकिन फ़्रांस और जर्मनी ने कहा है कि फ़िलहाल प्रतिबंधों की बात करना जल्दबाज़ी होगी. ईरान की धमकी ईरान पहले ही धमकी दे चुका है कि यदि ये मुद्दा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जाता है तो वह संयुक्त राष्ट्र के साथ इस बारे में सहयोग पूरी तरह ख़त्म कर देगा. फ़िलहाल ईरान संयुक्त राष्ट्र को अपने परमाणु केंद्रों की जाँच करने में सहयोग दे रहा है. लेकिन ईरान में हाल में बनाए गए क़ानून के तहत यदि मामला संयुक्त राष्ट्र में जाता है तो ईरान अपने परमाणु केंद्रो का निरीक्षण करवाने से पीछे हट सकता है. उधर अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने संयुक्त राष्ट्र से अनुरोध किया है कि वह इस मुद्दे पर ईरान का सामना करे क्योंकि उनके अनुसार ईरान की सरकार के ताज़ा क़दमों से बातचीत का आधार समाप्त हो गया है. ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी और अमरीका ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की बैठक बुलाकर इस मुद्दे पर विचार करने की बात कही है. लेकिन इन देशों ने ये भी उम्मीद जताई है कि कूटनीतिक प्रयासों से इस मामले का हल निकल आएगा. महत्वपूर्ण है कि रूस ने पहले तो ईरान के परमाणु तकनीक के विषय में आधिकार का समर्थन किया था लेकिन उसने भी मामला संयुक्त राष्ट्र में ले जाने की संभावना ख़ारिज नहीं की है. उधर ईरान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव से कहा है कि वह अब भी बातचीत करने का इच्छुक है. ईरान के मुख्य वार्ताकार अली लारीजानी ने कहा है कि अगस्ता में ठप्प हुई बातचीत दोबारा शुरु करने के प्रति गंभीर है. | इससे जुड़ी ख़बरें इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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