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विदेशी कंपनियों पर अमरीका की पाबंदी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका का कहना है कि उसने उन नौ विदेशी कंपनियों पर पाबंदी लगा दी है जिन्होंने ईरान को ऐसे उपकरण या तकनीक बेचे हैं जिनका इस्तेमाल मिसाइल या रसायनिक हथियार बनाने में हो सकता है. इन नौ कंपनियों में भारत की दो कंपनियाँ भी शामिल हैं. इन दो कंपनियों के नाम हैं- साबेरो ऑर्गेनिक्स और संध्या ऑर्गेनिक्स. इनके अलावा चीन की छह कंपनियों और ऑस्ट्रिया की एक कंपनी पर अमरीका ने पाबंदी लगाई है. पाबंदी के बाद अब ये कंपनियाँ अमरीकी सरकार व्यापार नहीं कर पाएँगी. साथ ही इन कंपनियों को किसी अमरीकी कंपनी से तकनीक हासिल करने के लिए आवश्यक निर्यात लाइसेंस भी नहीं मिल पाएगा. अमरीकी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता एडम इरेली ने इसकी घोषणा की. अमरीका ने ये कार्रवाई ईरानी परमाणु अप्रसार अधिनियम के तहत की है जिसे वर्ष 2000 में पास किया गया था. इस अधिनियम के तहत अगर अमरीकी सरकार अंतरराष्ट्रीय सहायता को रोक सकती है अगर उसे शक होता है कि यह ईरान के परमाणु, रसायनिक या जैविक हथियार कार्यक्रम के लिए है. अमरीका ईरान पर पहले भी आरोप लगाता रहा है कि वह परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की आड़ में परमाणु हथियार कार्यक्रम चला रहा है. इन कंपनियों पर प्रतिबंध की घोषणा करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एडम इरेली ने कहा, "इन कंपनियों पर पाबंदी पुख़्ता जानकारी के आधार पर लगाई गई है. सूचना ये है कि इन कंपनियों ने ऐसे उपकरण और तकनीक ईरान को दिए जो ईरान को न दिए जाने वाले उपकरणों की सूची में हैं." लेकिन इरेली ने ये नहीं बताया कि इन कंपनियों ने ईरान को कौन से उपकरण या तकनीक बेचे थे. अभी तक ईरानी परमाणु अप्रसार अधिनियम के तहत 40 कंपनियों पर पाबंदी लगाई जा चुकी है. | इससे जुड़ी ख़बरें यूरोपीय संघ-ईरान दोबारा मिलने को राज़ी21 दिसंबर, 2005 | पहला पन्ना होलोकॉस्ट एक मिथक: अहमदीनेजाद14 दिसंबर, 2005 | पहला पन्ना 'इसराइल को यूरोप में जगह दे दो'08 दिसंबर, 2005 | पहला पन्ना ईरान बातचीत पर विचार के लिए तैयार25 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना तेल मंत्री बनाने के मंसूबे पर फिरा पानी23 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना परमाणु मामले पर ईरान को और समय21 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना 'ईरान का मामला संयुक्त राष्ट्र नहीं जाएगा' 21 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना परमाणु मुद्दे पर ईरानी सांसदों का प्रस्ताव20 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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