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'ईरान संकट का शांतिपूर्ण हल हो' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि वे ईरान के परमाणु संकट का हल शांतिपूर्ण तरीक़े से निकालना चाहते हैं. वॉशिंगटन में जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल से मुलाक़ात के बाद राष्ट्रपति बुश ने कहा कि दोनों नेताओं ने इस मुद्दे का कूटनीतिक हल मिलकर निकालने के पक्ष में हैं. राष्ट्रपति बुश ने उन सवालों को टाल दिया कि सुरक्षा परिषद को ईरान पर पाबंदी लगानी चाहिए या नहीं. गुरुवार को यूरोपीय देशों के विदेश मंत्रियों ने अपील की थी कि संयुक्त राष्ट्र ईरान के परमाणु कार्यक्रम के मामला से निपटे. हालाँकि ईरान ये कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों के लिए है. वह परमाणु हथियार विकसित करने की बात से इनकार करता रहा है. ईरान ने धमकी दी है कि अगर उसका मामला सुरक्षा परिषद में भेजा गया तो वह संयुक्त राष्ट्र निरीक्षकों से अपने परमाणु केंद्र के निरीक्षण पर रोक लगा देगा. ईरान के मुद्दे पर सहमति व्यक्त करने के बाद राष्ट्रपति बुश ने कहा कि उन्होंने चांसलर एंगेला मर्केल का यह सुझाव ठुकरा दिया है कि ग्वांतानामो के हिरासत केंद्र को बंद कर देना चाहिए. चांसलर मर्केल ने राष्ट्रपति बुश के साथ बातचीत में यह मसला भी उठाया था. लेकिन राष्ट्रपति बुश ने यह कहकर यह सलाह ठुकरा दिया कि अमरीकी लोगों की सुरक्षा के लिए यह ज़रूरी है. संदेश अमरीका के पहले राजनयिक दौरे पर आई जर्मनी की चांसलर मर्केल ने कहा कि यह बहुत ज़रूरी है कि यूरोपीय संघ और अमरीका ईरान मामले पर एक रुख़ अपनाएँ और मिलकर काम करें.
उन्होंने कहा कि हमें अन्य देशों को भी अपने साथ लाने की कोशिश करनी चाहिए. मर्केल ने कहा कि वे किसी की धमकियों में नहीं आएँगी. दूसरी ओर राष्ट्रपति बुश ने कहा, "यह तर्कपूर्ण है कि ऐसा देश जिसने कूटनीतिक कोशिशों को ठुकरा दिया हो, उसका मामला सुरक्षा परिषद में भेजा जाए. जिसे पाबंदी लगाने का अधिकार है." उन्होंने कहा कि अमरीका, ईरान और अन्य देशों को एक सुर में ईरान के पास ये संदेश भेजने की आवश्यकता है कि वह दुनिया को डराने के लिए परमाणु हथियार न विकसित करे. गुरुवार को अमरीका, जर्मनी, फ़्रांस और ब्रिटेन ने ये चेतावनी दी थी कि ईरान का मामला सुरक्षा परिषद में भेजा जा सकता है. रूस ने भी ईरान का मामला सुरक्षा परिषद में भेजे जाने की संभावना से इनकार नहीं किया था. लेकिन संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत ने कहा था कि ऐसे क़दम से मामला और जटिल हो सकता है. इस बीच ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने स्पष्ट किया है कि ईरान अपने परमाणु कार्यों से पीछे नहीं हटेगा. मंगलवार को ईरान ने अपने नताज़ परमाणु केंद्र पर लगी संयुक्त राष्ट्र की सील तोड़ दी थी और परमाणु शोध कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की थी. | इससे जुड़ी ख़बरें इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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