BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
बुधवार, 11 जनवरी, 2006 को 15:26 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
अमरीका-ब्रिटेन ने ईरान पर दबाब बढ़ाया
ईरान
ईरान ने फिर से परमाणु शोध कार्य शुरू कर दिया है
अमरीका और ब्रिटेन ने ईरान पर दबाव बढ़ाना शुरु कर दिया है. अमरीका के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अब ये पहले से ज़्यादा संभव लगता है कि ईरान का मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भेजा जाएगा.

अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस अगले क़दम के बारे में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के सदस्यों से विचार-विमर्श कर रही हैं.

ह्वाइट हाउस का कहना है कि यूरेनियम संवर्धन का काम शुरू करने के लिए क़दम बढ़ाकर गंभीर ग़लती की है.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने भी कहा है कि परमाणु ईंधन पर काम शुरू करने के ईरान के फ़ैसले ने दुनियाभर में ख़तरे की घंटी बजा दी है. उन्होंने कहा कि ईरान का मामला अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भेजा जा सकता है.

अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस रूस के विदेश मंत्री सर्जेई लवारोफ़ और आईएईए के अन्य सदस्यों के साथ विचार-विमर्श कर रही हैं.

बीबीसी संवाददाता जोनाथन बील का कहना है कि यह स्पष्ट संकेत है कि अमरीका ईरान का मामला सुरक्षा परिषद में भेजने के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है.

अमरीका का दावा है कि ईरान का मामला सुरक्षा परिषद में भेजने के लिए उसके पास ज़रूरी वोट हैं. लेकिन अभी चीन ने इस मामले पर कोई रुचि नहीं दिखाई है.

अमरीका किसी भी आख़िरी निर्णय से पहले अपने यूरोपीय सहयोगियों से सलाह-मशविरा कर रहा है. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ब्लेयर ने तो खुल कर कहा है कि यह मामला सुरक्षा परिषद में भेजा जा सकता है.

उन्होंने संसद में घोषणा की कि गुरुवार को यूरोपीय मंत्रियों की बैठक में यह तय किया जाएगा कि इस मामले को आगे कैसे ले जाया जाए.

आपत्ति

इस बीच ईरान के परमाणु शोध कार्य फिर से शुरू करने की आलोचना जारी है. अमरीका और यूरोपीय देशों के बाद अब रूस ने भी इस पर आपत्ति जताई है.

कोंडोलीज़ा राइस इस मामले पर कई देशों से विचार-विमर्श कर रही हैं

रूस के रक्षा मंत्री सर्जेई इवानोफ़ ने कहा कि यह उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भी निराशा का कारण है. दूसरी ओर ईरान के पूर्व राष्ट्रपति हाशमी रफ़संजानी ने पश्चिमी देशों की आलोचना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और कहा कि यह ईरान पर धौंस जमाने वाली बात है.

रफ़संजानी ने कहा कि उन्हें आश्चर्य है कि लोकतंत्र, आज़ादी और मानवाधिकार के इस युग में ईरान के साथ ऐसा किया जा रहा है.

मंगलवार को अमरीका और जर्मनी ने भी ईरान के क़दम की आलोचना करते हुए मामला सुरक्षा रिषद में ले जाने की बात कही थी.

हालाँकि ईरान हमेशा से ये कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों के लिए है. ईरान ने यूरोपीय संघ के साथ बातचीत के दौरान ख़ुद से ही अपना परमाणु शोध कार्य रोक दिया था.

यूरोपीय संघ के देशों ने ईरान से गारंटी मांगी थी कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम का इस्तेमाल हथियार विकसित करने के लिए नहीं करेगा.

हालाँकि ईरान ने अपना पुराना पक्ष दोहराते हुए कहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों के लिए है.

इससे जुड़ी ख़बरें
होलोकॉस्ट एक मिथक: अहमदीनेजाद
14 दिसंबर, 2005 | पहला पन्ना
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>