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शनिवार, 03 दिसंबर, 2005 को 14:04 GMT तक के समाचार
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'सीआईए पर मुक़दमा करेगा एक संगठन'
क़ैदी
कुछ रिपोर्टों के मुताबिक़ कई क़ैदियों को गुप्त जेलों में भेजा जा रहा है
अमरीका के एक संगठन ने कहा है कि संदिग्ध चरमपंथियों को दूसरे देशों में भेजे जाने को रोकने के लिए वो सीआईए के ख़िलाफ़ अदालत में जाएगा.

ये संगठन एक व्यक्ति के लिए लड़ रहा है जिसे कथित तौर पर अफ़ग़ानिस्तान में सीआईए की एक गुप्त जेल में ले जाया गया.

नागरिक अधिकारों से जुड़े संगठन एसीएलयू यानि द अमेरिकन सिविल लिबरटिज़ यूनियन का कहना है कि खुफ़िया एजेंसी सीआईए ने ऐसा कर अमरीकी और अंतरराष्ट्रीय क़ानून दोनों को तोड़ा है.

संगठन ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा है “क़ानूनी दावे में सीआईए पर आरोप लगाया जाएगा कि उसने एक निर्दोष व्यक्ति को पकड़ कर, उसे पीट कर और अफ़ग़ानिस्तान में एक गुप्त जेल में भेज कर अमरीकी क़ानून और मानवाधिकरों का उल्लंघन किया है.”

संगठन ने व्यक्ति का नाम या वो किस देश से है इसके बारे में नहीं बताया है.
संगठन का कहना है कि वो व्यक्ति अगले हफ़्ते एक पत्रकार वार्ता में आएगा.

'गुप्त प्रकिया'

अमरीका की विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने कहा है कि वो सोमवार को यूरोप के दौरे पर जाने से पहले, विदेशों में सीआईए के कथित ख़ुफ़िया जेल होने के बारे में बयान देंगी.

उन्होंने कहा कि सीआईए के कथित ख़ुफ़िया जेलों के बारे में यूरोपीय संघ ने जो सवाल उठाए हैं वे उनका जवाब देंगी.

नागरिक अधिकारों से जुड़ा संगठन एसीएलयू उन कंपनियों का नाम भी उजागर करना चाहता है जिन पर संगठन ने बंदी को अमरीका से बाहर ले जाने के लिए हवाईजहाज़ उपलब्ध करवाने का आरोप लगाया है.

उल्लेखनीय है कि एक बेहद गुप्त प्रकिया के तहत ख़ुफ़िया एजेंसियाँ संदिग्ध चरमपंथियों को अमरीका से बाहर ले जाकर पूछताछ करती हैं.

बीबीसी संवादादाता का कहना है कि ये प्रकिया काफ़ी विवादास्पद होती जा रही है.

कई लोगों ने दावा किया है कि सीआईए ने उन्हें सीरिया और मिस्र जैसे देशों में ले जाकर पूछताछ की और बुरा बर्ताव किया.

लेकिन अमीरकी प्रशासन और उसकी ख़ुफ़िया एजेंसियाँ कहती आईं है कि उनकी सभी गतिविधियाँ क़ानून के दायरे में हैं.

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