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शनिवार, 19 नवंबर, 2005 को 11:02 GMT तक के समाचार
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ग्वांतनामो की वैधानिकता पर चिंता
लुइस आर्बर
संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार आयुक्त ने ग्वांतनामो में बंदी शिविर की वैधानिकता पर सवाल उठाए हैं
संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार आयुक्त लुइस आर्बर ने कहा है कि उन्हें क्यूबा के ग्वांतनामो बे में अमरीका के बंदी शिविर की वैधानिकता पर गंभीर चिंताएँ हैं.

आर्बर की यह टिप्पणी उस घटनाक्रम के समय आई हैं जब संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने ग्वांतनामो बे शिविर का दौरा यह कहते हुए रद्द कर दिया कि अमरीका बंदियों से अकेले में मिलने की इजाज़त नहीं दे रहा है.

आर्बर ने जिनेवा में बीबीसी से बातचीत में कहा कि अगर बंदियों को मनमाने तरीक़े से बंदी बनाए रखना और उनके साथ प्रताड़ना के आरोपों की जाँच के लिए बंदियों से बिना किसी रोकटोक के मिलने की इजाज़त दिया जाना बेहद ज़रूरी है.

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार पर्यवेक्षक ग्वांतनामो बे शिविर में बंदियों की स्थिति का मुआयना करने के लिए क़रीब चार साल से ज़ोर लगा रहे हैं लेकिन अमरीका ने दौरे की इजाज़त देते वक़्त कहा कि यह दौरा सिर्फ़ एक दिन का होगा और बंदियों से अकेले में मिलने की इजाज़त नहीं होगी.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त लुइस आर्बर ने अपने दल की इस माँग का समर्थन किया कि अमरीका की इस शर्त पर सहमत नहीं हुआ जा सकता.

उन्होंने ग्वांतनामो बे शिविर में बिना मुक़दमा चलाए लोगों को बंदी बनाकर रखने के आधार की वैधानिकता पर भी सवाल उठाए हैं.

आर्बर ने कहा, "ऐसा लगता है कि जिस तरह से लोगों को बंदी बनाकर रखा गया है वह अंतरराष्ट्रीय मानकों से मेल नहीं खाता है, ख़ासतौर से ऐसे में, जब किसी बंदी को स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायिक अधिकार हासिल नहीं हैं."

"इसलिए वस्तुस्थिति को देखते हुए मुझे ग्वांतनामो शिविर में लोगों को बंदी बनाने के बारे में मुझे गंभीर चिंताएँ हैं."

मानकों पर चिंता

जिनेवा में बीबीसी संवाददाता इमोजेन फाउल्केस का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यकर्ता सबसे ज़्यादा इस बात पर चिंतित हैं कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई जिस तरह से लड़ी जा रही है उससे ऐसा लगता है कि प्रताड़ना की मनाही करने वाले मानकों की अनदेखी हुई है.

ग्वांतनामो बे शिविर में रखे गए बंदी
बंदियों के साथ बर्ताव पर चिंताएँ जताई गई हैं

अमरीका के कुछ अधिकारियों ने कहा है कि आतंकवादी हमला रोकने के लिए असाधारण हालात में प्रताड़ना की इजाज़त दी जा सकती है लेकिन संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त इस बात से सहमत नहीं हैं.

वह कहती हैं, "मेरा ख़याल है, यह बहुत कष्टकारी है और यह एक बेहद अहम मुद्दा है और यहाँ तक कि कथित असाधारण हालात में भी प्रताड़ना की बात करना अभूतपूर्व है."

आर्बर ने कहा, "प्रताड़ना के तरीक़े अपनाना किसी भी तरह के हालात में बिल्कुल निषिद्ध है."

आर्बर ने इन ख़बरों पर भी चिंता ज़ाहिर की कि अमरीका कुछ अन्य देशों में गुप्त बंदी गृह चला रहा है. उन्होंने तमाम देशों का आहवान किया कि वे इस तरह के अभियानों में सहयोग नहीं करें.

उन्होंने कहा कि देशों को किसी को बंदी बनाने के तरीकों के बारे में पारदर्शी नीति अपनानी होगी क्योंकि इस पारदर्शिता के बिना कोई भी मानवाधिकार संगठन या कार्यकर्ता यह पता लगाने में कामयाब नहीं हो सकते कि किसी ख़ास देश में मानवाधिकारों का सम्मान हो रहा है या नहीं.

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