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संयुक्त राष्ट्र में बर्मा के मुद्दे पर चर्चा होगी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को इस बात पर चर्चा करने के लिए राज़ी कर लिया है कि क्या बर्मा के अंदरुनी हालतों से क्षेत्रिय स्थायित्व पर असर पड़ रहा है. ऐसा पहली बार हुआ है कि अमरीका इस तरह की चर्चा करवाने में सफल रहा है. अमरीका ने कहा है कि वो चाहता है कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव स्वंय बर्मा के मुद्दे पर चर्चा करें. माना जा रहा है कि बर्मा पर चर्चा अगले दो हफ़्तों में होगी. संयुक्त राष्ट्र में अमरीका के राजदूत जॉन बोल्टन ने इस चर्चा को अहम क़दम बताया है. बर्मा की सैनिक सरकार ने हाल ही में विपक्ष की नेता आंग सांग सू ची को नज़रबंद रखने की अवधि बढ़ा दी है. इसके बाद ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बर्मा पर विचार विमर्श करने का फ़ैसला किया है और ये निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया. जून में भी बर्मा की स्थिति पर सुरक्षा परिषद में चर्चा करने की बात उठी थी लेकिन सुरक्षा परिषद में चर्चा नहीं हो पाई थी क्योंकि चीन, रूस और अल्जीरिया ने इसका विरोध किया था. जॉन बोल्टन ने मंगलवार को सुरक्षा परिषद को लिखा था कि बर्मा के मुद्दे पर चर्चा हो. उनका कहना था कि बर्मा क्षेत्रीय अस्थिरता पैदा कर रहा है क्योंकि वहाँ मानवाधिकारों की स्थिति अच्छी नहीं है और लोग दमन से बचने के लिए दूसरे देशों में जाकर शरण ले रहे हैं. बर्मा में संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिनिधि ने कहा है कि बर्मा की सैनिक सरकार को भी अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि किसी तरह का प्रतिबंध लगाने के बजाय बातचीत का रास्ता ज़्यादा कारगर रहेगा. | इससे जुड़ी ख़बरें संयुक्त राष्ट्र में बर्मा के मुद्दे पर चर्चा होगी02 दिसंबर, 2005 | पहला पन्ना सू ची की हिरासत अवधि 'बढ़ाई गई'27 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना लोकतंत्रवादी नेता सू ची 60 की हुईं19 जून, 2005 | पहला पन्ना एमनेस्टी की वार्षिक रिपोर्ट 25 मई, 2005 | पहला पन्ना सू ची के लिए अन्नान का आग्रह23 अप्रैल, 2005 | पहला पन्ना बर्मा के घटनाक्रम पर अमरीका चिंतित19 अक्तूबर, 2004 | पहला पन्ना बर्मा के लोकतंत्र समर्थको को वीसा नहीं16 अक्तूबर, 2004 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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