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मंगलवार, 19 अक्तूबर, 2004 को 23:29 GMT तक के समाचार
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बर्मा के घटनाक्रम पर अमरीका चिंतित
खिन न्यून्त
न्यून्त को अपेक्षाकृत नरमपंथी नेता माना जाता रहा है
बर्मा के प्रधानमंत्री खिन न्यून्त को हटाए जाने की ख़बर पर अमरीका ने चिंता प्रकट की है, अमरीका इस बात पर भी चिंतित है कि उनकी जगह लेफ़्टिनेंट जनरल सो विन को नियुक्त किया गया है जिनकी छवि एक कठोर सैनिक शासक की है.

अमरीकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह इस मामले पर गहरी नज़र रख रहा है. अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रिचर्ड बाउचर ने कहा है कि "इस नए घटनाक्रम से साफ़ है कि बर्मा राजनीतिक स्वतंत्रता और मानवाधिकार के मामले में सही दिशा में नहीं जा रहा है."

मंगलवार को रिचर्ड बाउचर ने कहा कि अमरीका इस बात से वाकिफ़ है कि बर्मा में कई राजनीतिक नेताओं को पिछले कुछ हफ़्तों में उनके पद से हटाया गया है जिनमें विदेश मंत्री और उनके सहयोगी भी शामिल हैं.

अमरीकी प्रवक्ता ने ज़ोर देकर अपनी माँग दोहराई कि लोकतंत्र समर्थक नेता आँग सान सू ची और अन्य राजनीतिक बंदियों को फौरन रिहा किया जाए.

अमरीका ने यह भी कहा है कि सू ची की पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी को बर्मा में दफ़्तर खोलने और राजनीतिक गतिविधियाँ आयोजित करने की भी स्वतंत्रता दी जाए.

खिन न्यून्त को हटाए जाने से अमरीका इसलिए चिंतित है क्योंकि उसे लगता है कि नए प्रधानमंत्री से सुधार और संवाद की उम्मीद नहीं की जा सकती.

आर्थिक प्रतिबंध

खिन न्यून्त को बर्मा के सैनिक प्रशासन में सबसे नरमपंथी नेताओं में माना जाता था और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कम से कम बातचीत के लिए रज़ामंदी का इज़हार तो किया ही था.

 इस नए घटनाक्रम से साफ़ है कि बर्मा राजनीतिक स्वतंत्रता और मानवाधिकार के मामले में सही दिशा में नहीं जा रहा है
रिचर्ड बाउचर

अमरीका में इस बात को लेकर भ्रम बना हुआ है कि न्यून्त को उनके नरमपंथी रवैए के कारण पद से हाथ धोना पड़ा या फिर वाक़ई भ्रष्टाचार के आरोपों में दम है.

इससे पहले सोमवार को अमरीका ने यूरोपियन यूनियन के उस फ़ैसले का स्वागत किया था जिसके तहत बर्मा के ख़िलाफ़ और कड़े प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है, यूरोपीय देशों का कहना है कि आँग सान सू ची की रिहाई के लिए दबाव बनाने के वास्ते यह क़दम उठाया जा रहा है.

अमरीका ने तो यहाँ तक कहा है कि यूरोपियन यूनियन को बर्मा को किए जाने वाले हर तरह के निर्यात पर रोक लगा देनी चाहिए.

अमरीका ने बर्मा पर पहले ही सख्ती दिखाई है, पिछले वर्ष जुलाई में अमरीका ने बर्मा पर व्यापक आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं जिनमें हर तरह के आयात-निर्यात पर रोक शामिल है.

अमरीका के आर्थिक प्रतिबंधों का बर्मा की अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ा है और बताया जाता है कि हज़ारों लोग बेरोज़गार हो गए हैं लेकिन अभी तक बर्मा के सैनिक शासक अपने रवैए पर अडिग हैं.

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