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बर्मा के लोकतंत्र समर्थको को वीसा नहीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत सरकार ने बर्मा के लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं और एशियाई सांसदों को दिल्ली में हो रहे तीन दिवसीय समारोह में जाने की अनुमति देने से इंकार कर दिया है. यह समारोह ऐसे समय में हो रहा है जब बर्मा के राष्ट्राध्यक्ष जनरल थान श्वे भारत आने वाले है. जिन लोगों को भारत सरकार ने वीसा नहीं दिया है उनमें से प्रमुख है सेइन विन जो उस संगठन के प्रमुख हैं जिसे निर्वासित बर्मा सरकार कहा जाता है. इस संगठन का नाम नेशनल कोएलिशन गवर्नमेंट ऑफ द यूनियन ऑफ बर्मा है. 1990 में बर्मा में सेना ने सत्ता अपने हाथों में ले ली थी. बर्मा की लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सान सू की अभी भी नज़रबंद हैं और देश में सैनिक शासन है. बर्मा में लोकतंत्र की फिर से बहाली के लिए दिल्ली में एक सम्मेलन किया जा रहा है जिसमें बर्मा के विभिन्न संगठनों के सौ से अधिक प्रतिनिधि और लोकतंत्र समर्थक जमा हो रहे है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस पूरे मामले पर टिप्पणी करने से इंकार कर दिया है. रिपोर्टों के अनुसार भारत सरकार बर्मा की सैनिक सरकार के साथ आर्थिक और सैनिक कारणों से संबंधों को मज़बूत करना चाहती है. शुक्रवार को शुरु हुए सम्मेलन में डा सेइन विन का वीडियो संदेश प्रसारित किया गया. यह सम्मेलन भारत के पूर्व रक्षा मंत्री जार्ज फर्नांडिस की अगुआई में हो रहा है. फर्नाडिस लंबे समय से बर्मा में लोकतंत्र बहाली के लिए काम करते रहे है लेकिन जब वो रक्षा मंत्री थे तभी बर्मा की सैनिक सरकार के साथ संबंधों में काफी सुधार किया गया. |
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