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आँग सान सू ची की रिहाई पर भ्रम | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बर्मा की सैनिक सरकार ने पुष्टि की है कि विपक्षी लोकतांत्रिक नेता आँग सान सू ची को नए संविधान पर विचार के लिए बुलाए जाने वाले सम्मेलन में आमंत्रित किया जाएगा. यह सम्मेलन 17 मई को होगा. पहले ख़बरें आई थीं कि सरकार ने 17 से पहले सू ची की नज़रबंदी समाप्त करने की घोषणा की है. बर्मा सरकार ने ऐसी ख़बरों का खंडन किया है. बर्मा के विदेश मंत्री विन आँग ने कहा है कि उनकी बात को तोड़मरोड़कर पेश किया गया और उन्होंने सू ची की रिहाई के बारे में कुछ नहीं कहा था. विदेश मंत्री का एक इंटरव्यू जापानी टेलीविज़न पर दिखाया गया जिसमें सू ची को सम्मेलन में आमंत्रित करने की बात कही गई थी. मंत्री के हवाले से ही यह भी कहा गया था कि सू ची कि नज़रबंदी 17 मई से पहले ख़त्म कर दी जाएगी. आँग सान सू ची पिछले साल मई से ही नज़रबंद हैं. उस समय सू ची के समर्थकों और सैनिक सरकार के समर्थकों के बीच झड़पें हुई थीं, तभी सू ची को उनके घर में ही नज़रबंद कर दिया गया था. बैंकाक में मौजूद बीबीसी संवाददाता कायली मौरिस का कहना है कि सरकार की तरफ़ से उठाया गया यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण क़दम है और इससे बर्मा में कोई ठोस बदलाव होने की उम्मीद की जा सकती है. दबाव बर्मा की सरकार पर आँग सान सू ची को रिहा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव भी पड़ रहा था.
पिछले साल जुलाई में अमरीका ने बर्मा पर प्रतिबंध लगा दिए थे और बर्मा के व्यवसाइयों का कहना है कि इन प्रतिबंधों से ख़ासतौर पर कपड़ा उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने भी दिन दिन पहले बर्मा की सैनिक सरकार ज़ुंटा से सू ची और उनकी पार्टी के अन्य बंधकों को रिहा करने का अनुरोध किया था. बर्मा की सैनिक सरकार ने पिछले महीने ऐलान किया था कि वह देश के लिए एक नया संविधान तैयार करने के वास्ते एक सम्मेलन बुलाने की इरादा रखती है. संयुक्त राष्ट्र ने कहा था कि बर्मा में होने वाला संवैधानिक सम्मेलन तभी कामयाब होगा जब उसमें आँग सान सू ची की पार्टी को भी शामिल किया जाए. |
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