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'हर छठी महिला घरेलू हिंसा की शिकार' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने घरेलू हिंसा पर हुए एक अध्ययन में पाया है कि दुनिया में हर छह में से एक महिला को अपने पति या संगी की हिंसा झेलनी पड़ी है. संस्था ने एक अंतरराष्ट्रीय जाँच के बाद कहा है कि ये समस्या विश्वव्यापी है जिसकी जड़ें बहुत भीतर तक बैठी हुई हैं. रिपोर्ट कहती है कि महिलाओं के ख़िलाफ़ शारीरिक और मानसिक हिंसा का प्रभाव बहुत हद तक एक जैसा रहा है चाहे वो दुनिया में कहीं भी रहती हों. इसमें कहा गया है कि एड्स की महामारी के बीच कुछ क्षेत्रों में महिलाओं और लड़कियों के साथ यौन दुर्व्यवहार की संख्या जिस कदर ऊँची है उससे स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक लगती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सात से अधिक वर्षों तक ये अध्ययन किया जिसमें अफ़्रीका, एशिया, यूरोप और लैटिन अमरीका की 24,000 महिलाओं से जानकारी ली गई. पीड़ित महिलाओं की संख्या अगर जापान में 15 प्रतिशत थी तो इथियोपिया में 71 प्रतिशत. विश्व स्वास्थ्य संगठन में परिवार और सामुदायिक स्वास्थ्य प्रभाग के सहायक निदेशक जॉय फ़ुमाफ़ी कहते हैं,"ज़रूरत इस बात की है कि सरकारें घरेलू हिंसा को एक समस्या के रूप में स्वीकार करें और इसके ख़िलाफ़ कड़े क़ानून बनाएँ". भारत अध्ययन में भारत की स्थिति के बारे में कहा गया है कि वहाँ लगभग 70 प्रतिशत विवाहित महिलाओं के ख़िलाफ़ हाथ उठाए गए हैं. ये भी कहा गया है कि भारत में महिलाओं के ख़िलाफ़ जो हिंसा होती है वह अन्य जगहों से कुछ अलग नहीं है. लेकिन कोलकाता में ऐसी पीड़ित महिलाओं के लिए काम करनेवाली एक संस्था की निदेशक का कहना है कि स्थित बदल रही है. स्वयं नामक इस संस्था की निदेशक अनुराधा कपूर कहती हैं,"नए क़ानून आए हैं, बहुत सारे टीवी चैनल आ गए हैं, इसलिए महिलाओं में जागरूकता भी बढ़ रही है और महिलाओं के साथ अपने मामलों को अदालत तक ले जाने का विकल्प भी बढ़ा है". लेकिन अनुराधा का मानना है कि अभी भी सामाजिक बदलाव की आवश्यकता है क्योंकि लोग इस विषय पर बात करने से कतराते हैं. साथ ही उनका कहना है कि सरकार को भी ऐसे क़ानूनों को अमल में लाना चाहिए जो घरेलू हिंसा की शिकार औरतों की रक्षा के लिए बनाए गए हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'दलित महिलाओं को निर्वस्त्र घुमाया गया'24 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस बेटियों को अधिकार देने पर प्रगति17 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस परदे के पीछे आज़ादी की एक बयार28 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना महिलाएँ भी नाइट शिफ़्ट कर सकेंगी29 मार्च, 2005 | भारत और पड़ोस ग़रीबी और एड्स का चेहरा बनती महिलाएँ08 मार्च, 2005 | पहला पन्ना अधिकारों के बावजूद हिंसा की शिकार08 मार्च, 2005 | भारत और पड़ोस 'युद्ध का ख़ामियाज़ा महिलाएँ भुगतती हैं'08 दिसंबर, 2004 | पहला पन्ना राजस्थान में महिला सरपंचों का हाल18 नवंबर, 2004 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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