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ग्वांतानामो जाने के प्रस्ताव से इनकार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार पर्यवेक्षकों ने ग्वांतानामो बे जाने का अमरीका का प्रस्ताव ठुकरा दिया है. उनका कहना है कि अगर क़ैदियों से मिलने नहीं दिया गया तो ये दौरा बेमाने है. पर्यवेक्षकों का कहना है कि वे कुछ पाबंदियों के लिए तो तैयार हैं लेकिन क़ैदियों के साथ एकेले में बात करने पर रोक उन्हें स्वीकार नहीं है. पर्यवेक्षकों ने कहा कि अगर क़ैदियों से नहीं मिलने दिए गया तो इससे दौरा का मक़सद पूरा नहीं होगा. पर्यवेक्षकों ने इस बात पर भी निराशा जताई कि ये दौरा सिर्फ़ एक दिन का रखा गया है और दो अन्य मानवाधिकार जाँचकर्ताओं को जाने की इजाज़त नहीं दी गई है. पर पर्यवेक्षकों का कहना है कि उन्हें भरोसा है कि अमरीका क़ैदियों से मिलने की माँग मान लेगा. पेंटागन के पास तीन साल पहले संयुक्त राष्ट्र की ओर से ग्वांतानामो बे जाने का अनुरोध आया था. ये शिविर 2002 में खोला गया था जब अफ़ग़ानिस्तन पर अमरीका ने हमला किया था. ग्वांतानामो बे में इस वक़्त 500 क़ैदी हैं. अब तक सिर्फ़ रेड क्रॉस को ही वहाँ जाने दिया गया है. संयुक्त राष्ट्र का आरोप है कि अमरीका ग्वांतानामो बे कैप जाने से उसे रोकता रहा है. | इससे जुड़ी ख़बरें ग्वांतानामो कैदियों की स्थिति पर चिंता08 अक्तूबर, 2005 | पहला पन्ना बंदियों के अधिकारों को सीनेट का समर्थन06 अक्तूबर, 2005 | पहला पन्ना दुर्व्यवहार के तीन और मामले सामने आए13 जुलाई, 2005 | पहला पन्ना 'ग्वांतानामो बे बंद करने की योजना नहीं'13 जून, 2005 | पहला पन्ना 'एमनेस्टी की रिपोर्ट ग़ैरज़िम्मेदाराना'30 मई, 2005 | पहला पन्ना 'क़ुरान के अपमान की पाँच घटनाएँ हुई'27 मई, 2005 | पहला पन्ना पिटाई की जाती थी:ग्वांतानामो कैदी06 फ़रवरी, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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