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सोमवार, 24 अक्तूबर, 2005 को 16:53 GMT तक के समाचार
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बग़दाद में तीन धमाके, 20 मारे गए
बग़दाद
धमाका इतना ज़ोरदार था कि शहर का बड़ा हिस्सा काँप उठा
इराक़ की राजधानी बग़दाद में शहर को बीचोबीच तीन बम धमाके हुए जिनमें कम से कम 20 लोग मारे गए हैं.

बताया गया है कि मारे गए ज़्यादातर लोग सुरक्षाकर्मी या इन होटलों के कर्मचारी थे.

ये धमाके दो बड़े होटलों के नज़दीक हुए हैं जहाँ दुनिया भर से आए पत्रकारों ने डेरा डाल रखा है.

फ़लस्तीन और शेरेटन होटल के पास हुए इन धमाकों को टेलीविज़न पत्रकारों ने अपने कैमरे में क़ैद कर लिया है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ये हमले आत्मघाती हमलावरों ने शाम के वक़्त किए जब ज़्यादातर लोग इफ़्तार की तैयारी कर रहे थे.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि हमलावर प्रचार चाहते थे इसलिए उन्होंने इन होटलों को चुना और उन्होंने जान-बूझकर थोड़े-थोड़े अंतर पर धमाके किए ताकि पत्रकार उन्हें रिकॉर्ड कर सकें.

समाचार एजेंसी एएफ़पी का कहना है कि अमरीकी सेना की एक बख़्तरबंद गाड़ी इस हमले में तबाह हो गई है लेकिन धमाके के वक़्त वह ख़ाली थी.

बीबीसी के संवाददाता जिम म्योर का कहना है कि धमाके इतने ज़ोरदार थे कि पूरे मध्य बग़दाद में सुने गए.

धमाका
तीन धमाके कुछ मिनटों के अंतराल पर हुए

इराक़ के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मौफ़क़ अल रूबाई का कहना है कि हमलावरों का मक़सद फ़लस्तीन होटल पर कब्ज़ा करके पत्रकारों को बंधक बनाना था लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि उन्हें इसकी जानकारी कहाँ से मिली.

इराक़ी पुलिस का कहना है कि इस पूर्वनियोजित हमले में तीन वाहनों का इस्तेमाल किया गया, इनमें इतने शक्तिशाली विस्फोटक लगे थे कि होटल की सुरक्षा के लिए बनी कंक्रीट की दीवार में सुराखें हो गईं.

दो धमाकों से बनी सुराख के बीच से एक ट्रक ने घुसने की कोशिश की लेकिन वह उसी सुराख़ में फँस गया, जब उसके ऊपर सुरक्षाकर्मी गोलियाँ चलाने लगे तो उसने धमाका कर दिया.

तीसरा धमाका सबसे ज़ोरदार था, आसमान में नारंगी रंग का गुबार उठा और दूर-दूर तक इमारतें थर्रा उठीं और हवा में मलबा उड़ने लगा.

जनमत संग्रह

ये धमाके ऐसे समय पर हुए हैं जबकि इराक़ के नए संविधान के भविष्य पर सवालिया निशान लग रहे हैं.

इराक़ के दो सुन्नी बहुल प्रांत जनमत संग्रह में नए संविधान के ख़िलाफ़ मतदान कर चुके हैं जबकि तीसरे प्रांत में गिनती जारी है.

उधर इराक़ में दो सुन्नी बहुल प्रांतों ने संविधान के मसौदे को नकार दिया है और पूरा ध्यान एक मिश्रित आबादी वाले सुन्नी बहुल निनेवेह प्रांत के नतीजे पर लगी हैं.

ऐसा इसलिए क्योंकि नियमों के अनुसार यदि 18 में से तीन प्रांत संविधान के मसौदे पर हुए जनमत संग्रह में दो-तिहाई बहुमत से उसे नकार देते हैं तो इसे अपनाया नहीं जा सकेगा.

दो सुन्नी बहुल प्रांत - अनबार (97 प्रतिशत मतों से) और सलाहुद्दीन ( 82 प्रतिशत मतों से) संविधान को नकार चुके हैं.

पंद्रह अक्तूबर को इराक़ में प्रस्तावित संविधान पर जनमतसंग्रह हुआ था और लगभग 64 प्रतिशत मतदान हुआ था.

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