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'सद्दाम हुसैन के मुक़दमे को लेकर आशंका' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मानवाधिकार संस्था ह्मूमन राइट्स वॉच ने कहा है कि उसे पूर्व इराक़ी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के मुक़दमे की निष्पक्षता पर संदेह है. सद्दाम हुसैन समेत आठ अन्य लोग बुधवार को अदालत के समक्ष पेश होंगे. इन सब पर 1982 में एक शिया गाँव में 100 से ज़्यादा नागरिकों को मारने का आरोप है. न्यूयॉर्क में आधारित संस्था ह्मूमन राइट्स वॉच का कहना है कि उसे इस बात का डर है कि मुक़दमे में अंतरराष्ट्रीय मापदंड़ों का पालन नहीं किया जाएगा. संस्था मौत की सज़ा और अदालत के काम में राजनीतिक दख़लअंदाज़ी जैसे मुद्दों को लेकर चिंतित है. सद्दाम हुसैन के वकील ये शिकायत करते रहे हैं कि उन्हें मुक़दमे की तैयारी करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया. संस्था का कहना है कि वो भी इस बात को लेकर चिंतित है. गवाही से इनकार इस बीच इराक़ के पूर्व उपप्रधानमंत्री तारिक़ अज़ीज़ के वकील ने इस ख़बर का खंडन किया है कि तारिक़ अज़ीज़ सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ गवाही देंगे. संडे टेलीग्राफ़ अख़बार ने अमरीकी अधिकारियों और तारिक़ अज़ीज़ के वकील के हवाले से एक लेख छापा था. इसमें लिखा गया था कि तारिक़ अज़ीज़ अपने ख़िलाफ़ मुख्य आरोप गिराए जाने के बदले में सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ गवाही देंगे. अप्रैल 2003 में आत्मसमर्पण करने के बाद से उन्हें एक गुप्त जगह पर रखा गया है. बीबीसी से बातचीत में वकील अब्दुल हक़ अल-अनी ने भी कहा है कि उनके पास ऐसा कोई सुबूत नहीं है कि सद्दाम हुसैन के पूर्व सहयोगी उनके ख़िलाफ़ गवाही देंगे. अब्दुल हक़ अल-अनी का कहना है कि वो सद्दाम हुसैन की क़ानूनू टीम की ओर से बोलने के लिए अधीकृत हैं. |
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