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सद्दाम हुसैन के ख़िलाफ़ मुकदमा शुरु | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन ने अपने ख़िलाफ़ बग़दाद में शुरू हुए मुक़दमे की सुनवाई के दौरान क़ानूनी प्रक्रिया की वैधता पर ही सवाल उठाए और कहा कि वे निर्दोष हैं. सद्दाम हुसैन और सात अन्य लोगों पर 1982 में 143 शिया मुसलमानों की हत्या के आदेश देने का आरोप हैं. इस मामले में चल रहे मुक़दमे की सुनवाई के दौरान सद्दाम हुसैन सहित बाक़ी लोगों ने भी अपने को निर्दोष कहा. मामले की सुनवाई 28 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी गई है. सुनवाई के दौरान सद्दाम हुसैन ने पूरी प्रक्रिया पर ही सवाल उठाए और जज से पूछा- आप कौन हैं, यह अदालत चाहती क्या है? सूट पहने, सद्दाम हुसैन दो सुरक्षाकर्मियों के साथ अदालत में पेश हुए. संभवत: उन्होंने अपने हाथ में क़ुरान की एक प्रति उठा रखी थी. बीबीसी संवाददाता के अनुसार वे पिछली बार के मुकाबले में पतले और वृद्ध नज़र आए. जब जज ने उन्हें बार-बार अपना नाम और पेशा बताने के लिए कहा तो सद्दाम ने उस अदालत की वैधता पर सवाल उठाए जिसमें उन पर मुकदमा चलाया जा रहा है. उनका कहना था, इराक़ के राष्ट्रपति के तौर पर मेरे सांविधानिक अधिकार बरक़रार हैं. मैं उस संस्था को मान्यता नहीं देता जिसने आपको इस तरह के अधिकार दिए हैं. जो अन्याय पर आधारित है वह सरासर अन्याय ही है. इस मामले में अगली सुनवाई 28 नवंबर को होगी. 'शियाओं की हत्या' पहले कुछ मुकदमों में से एक में उन पर आरोप है कि उन्होंने 1982 में 143 शियाओं की हत्या का आदेश दिया था. इन लोगों की हत्या, सद्दाम हुसैन पर उत्तरी बग़दाद में हत्या की कोशिश के नाकाम होने के बाद की गई थी. प्रारंभिक दौर में क़ानून दलीलें होनी है. सद्दाम के साथ ही सात अन्य लोगों पर भी मुकदमा चलेगा. सुनवाई से पहले उनके वकीलों ने कहा था कि वे मुक़दमा कम से कम तीन महीने के लिए स्थगित करने का अनुरोध करेंगे क्योंकि उनके विचार में भी इस अदालत को सद्दाम हुसैन पर मुक़दमा चलाने का क़ानूनी अधिकार नहीं है. उनका कहना है कि उन्हें पूरा विश्वास है कि सद्दाम निर्दोष हैं. सद्दाम हुसैन पर मुक़दमा भारी सुरक्षा वाले क्षेत्र ग्रीन ज़ोन में चलेगा और इसके लिए एक विशेष कमरा बनाया गया है जिसमें बुलेट प्रूफ़ शीशा लगा है और कुछ कटघरे बनाए गए हैं. मुक़दमे की सुनवाई पाँच जजों का एक पैनल कर रहा है जिनके नाम सुरक्षा कारणों से गुप्त रखे गए हैं. अदालत के भीतर कुछ पर्यवेक्षक और पत्रकारों को जाने की इजाज़त है लेकिन इराक़ के आम लोगों को वहाँ जाने की इजाज़त नहीं है. मुक़दमे की सुनवाई का फिल्मांकन करने की व्यवस्था की गई है. संदेह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने हाल ही में कहा था कि उसे पूर्व इराक़ी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के मुक़दमे की निष्पक्षता पर संदेह है. ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि उसे इस बात का डर है कि मुक़दमे में अंतरराष्ट्रीय मापदंड़ों का पालन नहीं किया जाएगा. संगठन मौत की सज़ा और अदालत के काम में राजनीतिक दख़लअंदाज़ी जैसे मुद्दों को लेकर चिंतित है. सद्दाम हुसैन के वकील ये शिकायत करते रहे हैं कि उन्हें मुक़दमे की तैयारी करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया. ह्यूमन राइट्सवॉच का कहना है कि वो भी इस बात को लेकर चिंतित है. |
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