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शुरुआती नतीजों में संविधान को समर्थन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ी संविधान पर हुए जनमतसंग्रह के शुरुआती नतीजों से यही लगता है कि ज़्यादा लोगों ने संविधान के पक्ष में मतदान किया है. लेकिन स्वतंत्र चुनाव आयोग का कहना है कि कम से कम एक सुन्नी प्रांत सलाहुद्दीन में लोगों ने संविधान को ठुकरा दिया है. सलाहुद्दीन में 20 प्रतिशत मतों के आधार पर कहा जा रहा है कि यहाँ 81.5 प्रतिशत लोगों ने संविधान को नामंज़ूर कर दिया है. लेकिन एक अन्य प्रांत दियाला में संविधान के पक्ष में 50 प्रतिशत से ज़्यादा मत पड़े हैंय अभी भी पाँच प्रांतों में मतगणना के नतीजे आने बाक़ी हैं जिनमें दो सुन्नी बहुल प्रांत हैं. अगर तीन प्रांतों में संविधान के समर्थन में दो तिहाई से कम मत पड़े तो संविधान नामंज़ूर हो जाएगा. पिछले शनिवार यानी 15 अक्तूबर को इराक़ में संविधान पर जनमतसंग्रह हुआ था. चुनाव आयोग के मुताबिक़ जनमतसंग्रह के दौरान 64 प्रतिशत के आसपास मत पड़े थे. जैसे की संभावना था कि शुरुआती नतीजे यही बताते हैं कि शिया और कुर्द इलाक़ों में संविधान के पक्ष में ज़्यादा मत पड़े हैं. इराक़ के स्वतंत्र चुनाव आयुक्त आदिल अल लामी ने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि वे ये नहीं बता सकते कि कब तक पूरे नतीजे आ जाएँगे. लेकिन उन्होंने इतना ज़रूर कहा कि कुछ दिनों में पूरे नतीजे आ जाएँगे. आदिल अल लामी ने बताया कि जनमतसंग्रह के बाद उन्हें गड़बड़ियों की 100 से ज़्यादा शिकायतें मिली थी. लेकिन ये शिकायतें गंभीर नहीं थी. |
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